फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार (परसराम भारती)।
तीर्थन घाटी के दुर्गम इलाकों में बसे छामणी गांव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब इरादे मजबूत हों और लोग एकजुट हों, तो विकास के रास्ते खुद बन जाते हैं। जिला कुल्लू के बंजार उपमंडल की ग्राम पंचायत कंडीधार में वर्षों से लंबित हामनी पुल का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह पुल केवल कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि गांववासियों की मेहनत, त्याग और सामूहिक संकल्प का जीवंत प्रतीक बन गया है।

इस पुल की कहानी किसी सरकारी योजना की नहीं, बल्कि आम लोगों की असाधारण पहल की है। भूतपूर्व सैनिक हरी सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर इस अधूरे सपने को साकार करने का बीड़ा उठाया।
शुरुआत में सरकार से मिली करीब चार लाख रुपये की राशि अपर्याप्त साबित हुई, लेकिन गांव ने हार नहीं मानी। लोगों ने आपस में सहयोग कर लगभग 9 लाख रुपये इकट्ठा किए और निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया। इस दौरान अंकित सूद ने सनशाइन हिमालयन कॉटेज की ओर से भूमि उपलब्ध करवाई, जिससे निर्माण कार्य की सबसे बड़ी बाधा दूर हुई। धनी राम, लाल सिंह, टेक सिंह, पंकी सूद सहित कई ग्रामीणों ने अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग देकर इस अभियान को मजबूती दी।

हालांकि, निर्माण कार्य के बीच में एक बार फिर धन की कमी ने रफ्तार रोक दी। ऐसे में गांववासियों ने कॉर्पोरेट जगत का दरवाजा खटखटाया। ट्राइडेंट ऑटोमोबाइल्स, बैंगलोर और एचवीटी फाउंडेशन को भेजी गई अपील ने रंग दिखाया।
हिमालयन वालंटियर्स टूरिज्म के सहयोग और हिमाचल से जुड़े समीर चौधरी के प्रयासों से ट्राइडेंट ऑटोमोबाइल्स ह्युंडई ने सीएसआर के तहत एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की। यह राशि दीपिका और सोनू सूद द्वारा स्थानीय नारसिंह जल उपभोक्ता संग्रह स्वयं सहायता समूह, छामणी को सौंपी गई, जिससे पुल के अधूरे कार्य को पूरा करने में नई गति मिली।

अब जब हामनी पुल लगभग तैयार है, तो इसका लाभ सीधे तौर पर ग्रामीणों के जीवन में दिखाई देगा। खासकर स्कूली बच्चों को अब जोखिम भरे रास्तों से गुजरना नहीं पड़ेगा, वहीं मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में आसानी होगी। बरसात और बर्फबारी के मौसम में यह पुल जीवनरेखा साबित होगा, जो गांव को मुख्य सड़क से जोड़े रखेगा।
ग्रामीणों ने इस उपलब्धि को साझा करते हुए सभी सहयोगकर्ताओं, संस्थाओं और कंपनियों का आभार व्यक्त किया है। उनके अनुसार, यह पुल केवल सुविधा नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। तीर्थन घाटी की यह पहल बताती है कि जब समाज, संस्थाएं और कॉर्पोरेट क्षेत्र एक साथ खड़े होते हैं, तो सबसे दूर बसे इलाकों में भी बदलाव की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

















