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सूखे खेतों में लौटी जान, फसल विविधीकरण से समखेतर बना ‘हरित क्रांति’ का उदाहरण

जोगिंदरनगर (फ्रंट पेज न्यूज़)

हिमाचल प्रदेश में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अगुवाई वाली सरकार के प्रयास अब ज़मीनी स्तर पर नतीजे देने लगे हैं। जोगिंदरनगर उपमंडल की ग्राम पंचायत बुल्हा भड़याड़ा के समखेतर गांव में वर्षों से सूखे पड़े खेत अब फिर से लहलहाने लगे हैं। यह बदलाव जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के सहयोग से बनी 39.47 लाख रुपये की बहाव सिंचाई परियोजना से संभव हो सका है।

इस परियोजना के तहत भेड़े नाला से पानी को पक्की नालियों और पाइपलाइन के ज़रिये खेतों तक पहुंचाया गया, जिससे करीब 12.80 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिली और 70 से अधिक किसान परिवारों को इसका सीधा लाभ हुआ। खेतों की नमी बनी रहने से अब यहां दो फसलें उगाई जा रही हैं—मुख्यतः गेहूं, मक्की, अदरक और हल्दी।

स्थानीय महिला किसान शीला देवी बताती हैं, “पिछले 10-12 साल से खेत पूरी तरह बंजर हो गए थे, पर अब हरियाली लौट आई है। खेती अब आत्मनिर्भरता का जरिया बन गई है। जाइका ने बीज भी मुफ्त दिए और फसल खरीदने की व्यवस्था भी की है।”

ग्राम प्रधान भीम सिंह का कहना है कि इस परियोजना ने गांव की तस्वीर बदल दी है। “युवाओं का रुझान खेती की तरफ बढ़ा है और अब पलायन भी रुका है।”

खंड परियोजना प्रबंधक अश्वनी कुमार ने बताया कि परियोजना को समयबद्ध पूरा किया गया और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया ताकि जल प्रबंधन कुशल हो सके।

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