फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार ।
राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय बंजार में आयोजित ‘सिराज उत्सव’ बड़े ही उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ। महाविद्यालय परिसर पूरे दिन उत्सवमय माहौल में डूबा रहा, जहां छात्र-छात्राओं ने विविध सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) जोगिंदर सिंह ठाकुर, शिक्षाविद एवं पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य द्वारा किया गया, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सुश्री निधि द्विवेदी, इंटरनेशनल रिमोट वर्कर एवं सामाजिक क्षेत्र की स्वयंसेवी उपस्थित रहीं। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए ऐसे आयोजनों को व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। हिंदी एकल गायन में अनु, आर्यन, केसर, मिनेश, अजय चौहान और वरुण ने मधुर प्रस्तुतियां दीं। एकल नृत्य में रामा, संगीता देवी, बबीता ठाकुर, ज्योति, सोहानी और चांदनी ने दर्शकों का मन मोह लिया। समूह नृत्य में अक्षिता एवं यमुना, नीलसुन एवं दिशा तथा डिंपल एवं समूह की प्रस्तुतियों ने खूब तालियां बटोरीं।

लोक संस्कृति की झलक लोक एकल गायन प्रतियोगिता में देखने को मिली, जिसमें अजय चौहान, केसर सिंह, अनु, पुष्पेंद्र, मिनेश और वरुण ने अपनी आवाज से हिमाचली परंपरा को जीवंत किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हिमाचली नाटी पर आधारित समूह नृत्य रहा—वीरेंद्र एवं समूह ने कुल्लवी नाटी, बबीता एवं समूह ने किन्नौरी नाटी, हिमानी एवं समूह ने महासवी नाटी तथा एनएसएस नाटी समूह ने मिक्स हिमाचली प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।

उत्सव के दौरान लोकनृत्य, समूह गीत, नाटक, फैशन शो सहित कई आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों की ऊर्जा, उत्साह और रचनात्मकता ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।
कॉलेज स्टूडेंट सेंट्रल एसोसिएशन (CSCA) के पदाधिकारियों—अध्यक्ष देवेंद्र, उपाध्यक्ष खुशबू, महासचिव डोर सिंह और संयुक्त सचिव मोहित ठाकुर—ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महाविद्यालय प्रशासन, प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ के सहयोग से आयोजित यह उत्सव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।

अंत में, कार्यक्रम का समापन सामूहिक उत्साह और उल्लास के साथ हुआ, जिसने ‘सिराज उत्सव’ को एक यादगार सांस्कृतिक आयोजन बना दिया।













