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नई फसल और खुशहाली का प्रतीक : उल्लास और आस्था के साथ मनाया जाएगा सैर पर्व

(फ्रंटपेज न्यूज़)

मंडी। प्राचीन मंदिरों की नगरी और छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध मंडी इस समय सैर पर्व की तैयारियों में डूबी हुई है। ऋतु परिवर्तन और नई फसल के आगमन का प्रतीक यह पर्व मंगलवार को पूरे जनपद में परंपरा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस बार की बरसात ने मंडीवासियों को गहरा नुकसान दिया, लेकिन अब लोग उस सदमे से उबरते हुए उत्सव की तैयारियों में जुट गए हैं। सेरी मंच पर सजी दुकानों में खरीदारी का खास उत्साह देखने को मिल रहा है। जिला मंडी प्रशासन ने इस अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया है।

किसानों की खुशहाली और आस्था का पर्व

सैर पर्व को अनाज पूजा का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन पेठू पूजन का विशेष महत्व है। किसान अपनी नई फसल — मक्की, धान, तिल, कोठा और गलगल — की पूजा कर समृद्धि और भरपूर पैदावार की कामना करते हैं। इस दिन अखरोट और दूर्बा (द्रुब) बड़े-बुजुर्गों को भेंट कर आशीर्वाद लेने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। बच्चे और युवा इस दिन अखरोट खेलने की परंपरा में शामिल होते हैं। हालांकि मान्यता है कि इस दिन मक्की और अखरोट का सेवन वर्जित है।

भादो माह का समापन और लोक मान्यताएं

भादो माह, जिसे स्थानीय परंपराओं में ‘काला महीना’ कहा जाता है, का समापन भी सैर पर्व के साथ होता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नवविवाहिताएं मायके में रहती हैं और आश्विन संक्रांति यानी सैर पर्व पर ससुराल लौटती हैं। इसके साथ ही लोक विश्वास यह भी है कि इस दौरान ग्राम देवता मंदिरों से निकलकर द्रंग क्षेत्र की घोघरधार में डायनों से युद्ध करने जाते हैं और सैर पर्व के दिन उनकी वापसी होती है। गूरों द्वारा इस दिव्य युद्ध का वर्णन किया जाता है, जिससे धार्मिक आस्था और सामुदायिक एकता मजबूत होती है।

ग्रामीण संस्कृति का जीवंत उत्सव

सैर पर्व केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि ग्रामीण संस्कृति का जीवंत उत्सव भी है। खेत-खलिहानों की उपज, पशुधन और लोक परंपराएं इस पर्व में झलकती हैं। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक गीत और लोक नृत्य इसकी रौनक को बढ़ा देते हैं। गांवों में सामूहिक भोज और मेल-जोल का माहौल पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवित रखता है।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच सैर पर्व लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का अवसर देता है। यह त्योहार न केवल धार्मिक विश्वास और कृषि आधारित जीवन का प्रतीक है बल्कि मंडी जनपद की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मेल-जोल का भी आधार है।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने सैर पर्व की सभी जिलावासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व खुशहाली और समृद्धि लेकर आए तथा सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक परंपराओं को और मजबूती प्रदान करे।

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