फ्रंट पेज न्यूज़, (शर्मा सी आर) आनी (कुल्ल)
आनी क्षेत्र के चपोहल गाँव में आयोजित श्रीराम चरितमानस कथा के चौथे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा के दौरान व्यास आचार्य डॉ. दया नंद गौतम ने अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

उन्होंने भगवान श्रीराम के नामकरण संस्कार का उल्लेख करते हुए बताया कि राजा दशरथ के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ ने किस प्रकार विधि-विधान से यह संस्कार सम्पन्न कराया। उन्होंने कहा कि ग्रह-नक्षत्रों का मनुष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, किन्तु सच्ची भक्ति से व्यक्ति अपने जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता स्थापित कर सकता है।
डॉ. गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला का मार्गदर्शन है। यह मनुष्य को नैतिकता, धैर्य और कर्तव्यपरायणता का पाठ पढ़ाती है, जिससे समाज में सौहार्द और शांति का वातावरण बनता है।

कथा के दौरान भजन गायक लाल सिंह और राकेश शर्मा ने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भजनों की धुन पर महिलाओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य कर आयोजन में रंग भर दिया।
इस अवसर पर शिक्षाविद डॉ. मुकेश शर्मा ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में लेखक एवं साहित्यकार दीपक शर्मा, सेवानिवृत्त सीएचटी सुनंदन शर्मा, सेवानिवृत्त कानूनगो राजकुमार शर्मा तथा साहित्यकार छबिन्द्र शर्मा उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों का टोपी व मफलर पहनाकर भव्य स्वागत किया।

अपने संबोधन में मुख्यातिथि डॉ. मुकेश शर्मा ने कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति का अद्वितीय ग्रंथ है, जो हमें धर्म, परिवार और समाज के प्रति हमारे कर्तव्यों का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब मनुष्य अपने भीतर के विकारों से संघर्ष कर रहा है, तब रामकथा हमें संयम, प्रेम और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
वहीं, विशिष्ट अतिथि दीपक शर्मा ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि रामचरितमानस की शिक्षाओं को अपनाकर हमें अपने जीवन को अनुशासित और संस्कारित बनाने का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से अपनी पारंपरिक संस्कृति को संजोकर रखने का आह्वान किया।
इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक जे.आर. सरस्वती, नरेश शर्मा, दीन दयाल शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, शेष पाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।





















