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पहाड़ी आंगन: आत्मनिर्भरता, संस्कृति और स्वाद का जीवंत संगम — हिमाचल में महिला शक्ति की नई पहचान

शिमला (फ्रंटपेज न्यूज़)

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक बैंटनी कैसल में आयोजित ‘पहाड़ी आंगन’ प्रदर्शनी इन दिनों आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक विरासत और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है। यह आयोजन न केवल हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति और व्यंजनों को प्रदर्शित करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को एक सशक्त मंच भी प्रदान करता है, जहां वे अपने उत्पादों और हुनर के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बन रही हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इस पहल के पहले चरण में शिमला जिला की स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) की महिलाओं को भागीदारी दी गई है। कुल 12 स्टॉल्स पर पारंपरिक व्यंजनों, हस्तशिल्प वस्तुओं और हिम-ईरा ब्रांड के तहत तैयार स्थानीय उत्पादों की बिक्री हो रही है। यह प्रदर्शनी स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है, जिसमें सांस्कृतिक परिधान, लोक संगीत और स्वादिष्ट व्यंजन सब कुछ शामिल है।

इस कार्यक्रम में भाग ले रहीं महिलाएं केवल उत्पाद निर्माता नहीं, बल्कि सफल व्यवसायी, निर्णयकर्ता और उद्यमिता की मिसाल बनकर सामने आई हैं। जैसे कि रामपुर विकास खंड की कांता देवी, जो ‘पालदेनलामों स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी हैं, उन्होंने 30 मई से ‘पहाड़ी आंगन’ में स्टॉल लगाकर अपने पारंपरिक उत्पाद बेचना शुरू किया और इसे रोजगार व आत्मनिर्भरता का सुनहरा अवसर बताया। सुमन, जो खलीनी क्षेत्र की एक गृहिणी थीं, अब अपने हुनर से आत्मनिर्भर बनी हैं और सरकार को धन्यवाद देते हुए अन्य महिलाओं को भी आगे आने की प्रेरणा दे रही हैं। वहीं पूनम, ‘नारी शक्ति स्वयं सहायता समूह’ की अध्यक्ष, इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा बदलाव मानती हैं, जहां उन्हें पहली बार घर से बाहर निकलकर काम करने का अवसर मिला।

प्रदर्शनी में भाग ले रहे नागरिकों का अनुभव भी उतना ही खास रहा। जिला सोलन निवासी 65 वर्षीय शीला ने बताया कि उन्होंने यहां खरीदारी की और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखा, जो उन्हें घर जैसा अनुभव दे गया। उनके अनुसार, यहां का माहौल, संगीत और उत्साह सभी कुछ यादगार है।

प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक 42,502 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनमें 3,48,428 महिलाएं सदस्य हैं। इनमें से 29,035 समूहों को ₹58.22 करोड़ की पराक्रमी निधि, 1,120 ग्राम संगठनों को ₹41.05 करोड़ की सामुदायिक निवेश निधि, और 117 क्लस्टर स्तरीय संघों को सरकार द्वारा सहयोग प्रदान किया गया है।

अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक वर्मा ने इस पहल को महिला सशक्तिकरण और पर्यटन विकास की दृष्टि से ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि ‘पहाड़ी आंगन’ नारी शक्ति के साथ-साथ शिमला के पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। वहीं हितेंद्र शर्मा, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी, हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने जानकारी दी कि पहले चरण के बाद किन्नौर, फिर अन्य जिलों की महिलाओं को भी इस मंच से जोड़ा जाएगा, ताकि वे अपने पारंपरिक व्यंजन और उत्पाद देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचा सकें।

‘पहाड़ी आंगन’ इस समय सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि हिमाचल की महिला शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। यह पहल हिमाचल की महिलाओं को नया आत्मविश्वास दे रही है, साथ ही राज्य की विविधताओं को एक साझा मंच पर लाकर न केवल सांस्कृतिक संरक्षण कर रही है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए द्वार भी खोल रही है।

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