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निस्वार्थ सेवा की त्रिवेणी से बदला बंजार का सामाजिक परिदृश्य

On: February 3, 2026 5:53 PM
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फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।

एनएसएस इकाई बंजार की ‘सोंगी–अनमोल–संवेदना’ पहल बनी हिमाचल में मिसाल

मानव सेवा, सामाजिक सद्भाव और जीव-जगत के संरक्षण को केंद्र में रखकर राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई, राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय बंजार ने सेवा का ऐसा जीवंत मॉडल प्रस्तुत किया है, जो अब केवल बंजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है। 17 जनवरी 2026 से आरम्भ हुई ‘सोंगी’, ‘अनमोल’ और ‘संवेदना’—तीन समन्वित और व्यावहारिक पहलों ने सेवा को संकल्प और संवेदना को संस्कार का रूप दे दिया है।


इन पहलों के माध्यम से एनएसएस स्वयंसेवी स्वास्थ्य, यातायात और पशु कल्याण जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिदिन निस्वार्थ भाव से जुटे हैं। लक्ष्य साफ है—स्वच्छ, सौहार्दपूर्ण और मानवीय समाज की ठोस बुनियाद।


अस्पताल में ‘सोंगी’: सेवा का आत्मीय चेहरा
स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंजार में संचालित ‘सोंगी’ पहल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित परियोजना सारथी का स्थानीय, सांस्कृतिक और मानवीय रूप है। यहां स्वयंसेवी मरीजों और उनके तीमारदारों की पर्ची बनवाने से लेकर जांच प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन, सही कक्ष तक पहुंचाने और स्थानीय बोली में संवाद कर मानसिक संबल देने तक हर स्तर पर सहयोग कर रहे हैं।


रोस्टर आधारित सेवाओं के तहत प्रातः 10 बजे से दोपहर बाद तक स्वयंसेवी प्राथमिक उपचार, जैविक अपशिष्ट प्रबंधन और मानवीय व्यवहार का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त कर रहे हैं। परिणामस्वरूप अस्पताल प्रशासन और मरीजों के बीच विश्वास और आत्मीयता का सेतु मजबूत हुआ है।
‘अनमोल’: सड़क सुरक्षा से जीवन रक्षा का संकल्प
पुलिस प्रशासन बंजार के संयुक्त तत्वावधान में चल रहा ‘अनमोल’ प्रयास यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा को लेकर एक प्रभावी सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में उभरा है। चिन्हित स्थलों पर स्वयंसेवी पुलिस जवानों के साथ मिलकर यातायात व्यवस्था संभालते हैं, वाहन चालकों को नियमों के पालन के लिए जागरूक करते हैं और सुरक्षित, मंगलमय यात्रा का संदेश देते हैं। इस पहल का मूल उद्देश्य—मानव जीवन की रक्षा—हर गतिविधि में स्पष्ट दिखता है।
‘संवेदना’: बेसहारा पशुओं के लिए सहारा
बंजार क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की समस्या को ध्यान में रखते हुए ‘संवेदना’ के अंतर्गत परियोजना धण की शुरुआत की गई। उपमंडलीय पशु चिकित्सालय बंजार के सहयोग से घायल पशुओं का उपचार, आहार व्यवस्था और संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। ठंड के मौसम में बाजार से बची सब्जियों को एकत्र कर पशुओं तक पहुंचाना इस पहल की मानवीय संवेदना को दर्शाता है।
इसके साथ ही व्यापार मंडल, नगर पंचायत, ग्राम पंचायतें, लोक निर्माण विभाग और गौशालाओं से समन्वय स्थापित कर वैधानिक जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया गया है।
राज्य निर्देशों से मिला संबल
परियोजना सारथी की राष्ट्रीय सफलता से प्रेरित होकर उच्चतर शिक्षा निदेशालय, हिमाचल प्रदेश ने 30 जुलाई 2025 को प्रदेश के सभी महाविद्यालयों को इसके क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए थे। इसी क्रम में बंजार महाविद्यालय ने स्थानीय बोली और भावनाओं से जुड़ा नाम “सोंगी” (साथी) देकर इस पहल को जन-जन से जोड़ा।
इन तीनों पहलों का शुभारम्भ स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में किया गया।
कार्यक्रम अधिकारी के भावपूर्ण शब्द—“मेरे बच्चे सबसे अच्छे हैं।”—इन सेवाओं की आत्मा को अभिव्यक्त करते हैं।
कुल मिलाकर, एनएसएस इकाई बंजार के ये प्रयास हिमाचल प्रदेश में अपनी तरह के पहले, समग्र और विलक्षण माने जा रहे हैं। ये न केवल क्षेत्र में सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की नींव रख रहे हैं, बल्कि स्वयंसेवियों को संवेदनशील, जिम्मेदार और उच्च चरित्र का नागरिक भी गढ़ रहे हैं।

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