फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार
13 वर्षों में NH-305 का ‘चार–पांच किलोमीटर’ विकास—जनता पूछ रही, आखिर गड़बड़ कहां?
हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़कें जीवन का आधार हैं। ऐसे में जब नेशनल हाईवे ही खस्ताहाल हो, तो लोगों का आक्रोश स्वाभाविक है। नेशनल हाईवे-305, जिसे 2012 में NH का दर्जा मिला, आज भी स्टेट हाईवे से भी ज्यादा जर्जर हालत में है।
लूहरी से सिर्फ 4–5 किलोमीटर सड़क का ही चौड़ीकरण व पक्कीकरण हो पाया है। औट से घयागी और बंजार तक का मार्ग राहगीरों के लिए आज भी किसी परीक्षा से कम नहीं।
औट–घयागी–बंजार 35 किलोमीटर: जहां सड़क कम, गड्ढे ज्यादा
इस पूरे मार्ग की स्थिति ऐसी है कि वाहन चालक कहते हैं—
“गाड़ी नहीं, हिम्मत चलती है… सड़क खुद ही ढूंढनी पड़ती है।”
गड्ढे, उबड़-खाबड़ सड़कें और लगातार लगने वाला जाम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भारी प्रभावित कर रहा है। बदहाली की सबसे बड़ी वजह है कि आज तक NH-305 के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई।

स्थानीय लोगों में सवाल उठना स्वाभाविक है—
13 साल में आखिर इतनी धीमी प्रगति क्यों?
पर्यटन पर सबसे बड़ा संकट: ‘पर्यटक कसम खाकर लौटते हैं’

होटल व्यवसायी प्रकाश ठाकुर कहते हैं—
“खराब सड़कें और घंटों का जाम पर्यटन उद्योग को खत्म कर रहे हैं। विदेशी पर्यटक, एंबेसी स्टाफ, ब्यूरोक्रेट्स और VIP गेस्ट कई वर्षों से यहां आ ही नहीं रहे। जो आते हैं, वे दोबारा न आने की कसम खाकर जाते हैं।”
उनका कहना है कि इलाके की नकारात्मक छवि दूर-दूर तक फैल चुकी है और इसे संभालने में वर्षों लगेंगे।
टैक्सी चालक परेशान: ‘गाड़ी खराब, कमाई आधी’

पूर्व अध्यक्ष, बंजार टैक्सी यूनियन अनुज गौतम कहते हैं—
“सड़कों की हालत इतनी खराब है कि गाड़ियों का सत्यानाश हो रहा है। जाम में घंटों फंसे रहते हैं, मुश्किल से एक चक्कर पूरा कर पाते हैं।”
स्थानीय बाजार पर सीधा असर: ग्राहक दूसरी जगह चले गए

व्यापारी विवेक शर्मा का कहना है—
“जाम और टूटी सड़कें व्यापार की कमर तोड़ रही हैं। ग्राहक अब दूसरी मार्केट में खरीदारी कर रहे हैं क्योंकि यहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है।”
छात्राओं की पीड़ा: स्कूल–कॉलेज पहुंचना हुआ मुश्किल

राजकीय महाविद्यालय बंजार की छात्राएँ गुंजन कुमारी और चेतना कहती हैं—
“सड़क की हालत और जाम के कारण समय पर कॉलेज पहुंचना मुश्किल होता जा रहा है। पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।”
विधायक सुरेंद्र शौरी ने उठाए सवाल: “सरकार की लापरवाही का नतीजा NH-305 की दुर्गति”

विधायक सुरेंद्र शौरी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा—
“हिमाचल सरकार की अकर्मण्यता के कारण NH-305 की यह हालत हुई है। केंद्र सरकार ने घयागी से बंजार एज–टू–एज टायरिंग के लिए 8 करोड़, औट–बंजार पैंचवर्क के लिए 2.50 करोड़, डंगों के लिए 300 करोड़ और पूरे एनएच की DPR के लिए 1400 करोड़ से अधिक स्वीकृत किए।
लेकिन प्रदेश सरकार और NH विभाग इन पैसों का सही उपयोग करने में असफल रहे।”
विभाग का पक्ष: “काम प्रगति पर है, पर मौसम अनुकूल नहीं”

अधिशासी अभियंता के.एल. सुमन ने कहा—
“डंगों का काम जारी है। घयागी–बंजार टायरिंग और औट–बंजार पैंचवर्क के टेंडर हो चुके हैं, लेकिन वर्तमान मौसम काम के लिए अनुकूल नहीं है।”
जनता थक चुकी—समाधान कब?
NH-305 की बदहाल स्थिति ने पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और रोजमर्रा के जीवन को गहरे तौर पर प्रभावित किया है।
लोगों को अब सिर्फ एक सवाल परेशान कर रहा है—
“जनता पूछ रही है—सड़क सुधरेगी कब? जब कोई काम करेगा… या जब कोई फरिश्ता उतर आएगा?”














