फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
देशभर में आज से नए वित्तीय वर्ष 2026–27 की औपचारिक शुरुआत हो गई है। इसके साथ ही व्यापारियों, उद्यमियों एवं सेवा प्रदाताओं के लिए जीएसटी नियमों के तहत इनवॉइस (बिल) जारी करने से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान लागू हो गए हैं।
कर विशेषज्ञों के अनुसार, Central Goods and Services Tax Act, 2017 की धारा 31 तथा CGST Rules, 2017 के Rule 46 के तहत प्रत्येक टैक्स इनवॉइस में वित्तीय वर्ष के अनुसार यूनिक और क्रमबद्ध सीरियल नंबर होना अनिवार्य है। ऐसे में पिछले वित्तीय वर्ष 2025–26 की बिल सीरीज को नए वित्तीय वर्ष में जारी रखना नियमों के विरुद्ध माना जाएगा।

नई इनवॉइस सीरीज अनिवार्य
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यापारियों को 01 अप्रैल 2026 से नई इनवॉइस या बिल सीरीज शुरू करनी होगी, जिसकी शुरुआत 01 से की जानी चाहिए। प्रत्येक इनवॉइस का नंबर अलग, यूनिक और क्रम में होना जरूरी है, ताकि लेखा-जोखा और कर निर्धारण में पारदर्शिता बनी रहे।

मैनुअल बिलिंग करने वालों के लिए निर्देश
जो व्यापारी अभी भी मैनुअल बिलिंग प्रणाली का उपयोग करते हैं, उन्हें नए वित्तीय वर्ष के साथ नई बिल बुक का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा। साथ ही, प्रत्येक बिल पर सही वित्तीय वर्ष (2026–27) और तिथि का स्पष्ट उल्लेख करना जरूरी है।
अनुपालन न करने पर हो सकती है परेशानी
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि इन नियमों का पालन नहीं किया गया, तो ऑडिट या विभागीय जांच के दौरान समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। गलत या दोहराव वाली इनवॉइस सीरीज कर नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकती है।
व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपनी अकाउंटिंग प्रणाली को अपडेट करें और जीएसटी प्रावधानों के अनुरूप इनवॉइसिंग सुनिश्चित करें। आवश्यकता पड़ने पर कर सलाहकारों या संबंधित विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने की भी अपील की गई है।
नए वित्तीय वर्ष के साथ इनवॉइस सीरीज में बदलाव केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि कानूनी अनिवार्यता है। इसका पालन न केवल जीएसटी नियमों के अनुरूप है, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय या कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए भी बेहद जरूरी है।















