फ्रंट पेज न्यूज़ (बंजार)
भारतीय सनातन परंपरा के नव आरंभ विक्रम संवत 2083 के पावन अवसर पर बंजार स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विविध आयामों के माध्यम से एक अत्यंत भव्य, अनुशासित एवं सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक उत्सव न होकर समाज में संस्कार, समरसता और राष्ट्रभावना के जागरण का सशक्त माध्यम बना।

संघ की कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के अंतर्गत नगर बंजार, गुशैणी एवं गाडगुसैणी इकाइयों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों—युवा, मातृशक्ति, वरिष्ठ नागरिकों एवं बालकों—की सक्रिय सहभागिता ने इसे एक सजीव सामाजिक समागम का रूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि व्यापार मंडल अध्यक्ष परमेश शर्मा द्वारा विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके उपरांत मातृ वंदना, देशभक्ति गीतों एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन-यज्ञ संपन्न हुआ। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं राष्ट्रभक्ति से अनुप्राणित कर दिया।
इस अवसर पर जिला संघ चालक डॉ. राजकुमार शर्मा, मुख्य वक्ता डॉ. भुवनेश, हिमाचल प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख श्रीमती पावनी, खंड संघ चालक मेघ सिंह और कुटुंब प्रबोधन गतिविधि जिला बंजार मातृ शक्ति प्रमुख श्रीमती हेमा सहित संघ के विभिन्न दायित्वधारी पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने उद्बोधनों में संघ के वर्षपर्यंत चलने वाले विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन निर्माण नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग में नैतिकता, अनुशासन एवं राष्ट्रहित की भावना को सुदृढ़ करना है।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में सनातन मूल्यों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। परिवार संस्था को सुदृढ़ बनाना, सामाजिक समरसता को बढ़ाना तथा युवाओं में सांस्कृतिक चेतना जागृत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। भी
मुख्य अतिथि परमेश शर्मा ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन समाज के लिए ऊर्जा स्रोत का कार्य करते हैं। उन्होंने आधुनिकता और परंपरा के संतुलन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आगे बढ़ेंगे, तभी समाज सशक्त और जागरूक बन सकेगा। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” के आदर्श को आत्मसात करने और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मातृशक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी ने इसे विशेष गरिमा प्रदान की। कुलवी नाटी, एकल एवं समूह गान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तथा प्रेरक उद्बोधनों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि समाज में अपनी संस्कृति, परंपरा एवं राष्ट्र के प्रति गहरा लगाव और जागरूकता निरंतर बढ़ रही है।
समापन में यह आयोजन केवल नववर्ष उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा।













