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बंजार में गूंजा नशा-विरोध का संदेश: “युवा बचाओ – भविष्य बचाओ अभियान 2025” के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

फ्रंट पेज न्यूज कुल्लू ।

नशा केवल शरीर के लिए घातक नहीं, बल्कि मानव जीवन के पूर्ण विनाश का कारण बन सकता है यदि इसकी लत लग जाए और समय रहते उपचार न किया जाए। आज के समय में चिट्टा, हेरोइन जैसे रासायनिक नशे युवा पीढ़ी को अपने मकड़जाल में फंसाकर बर्बाद कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश ज्ञान-विज्ञान समिति द्वारा बंजार कला केंद्र में आयोजित नशा-विरोधी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बंजार के तहसीलदार नीरज शर्मा ने कहा कि समाज को नशे के खिलाफ एकजुट होकर सजग होना होगा, तभी इस फैल रही महामारी पर रोक लगाई जा सकती है।

उन्होंने बताया कि “युवा बचाओ – भविष्य बचाओ अभियान 2025” के तहत कुल्लू, मंडी और हमीरपुर जिलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को नशे के चंगुल से बाहर रखा जा सके।

कार्यक्रम में कला जत्थे ने संगीत, नाटक और प्रभावशाली संदेशों के माध्यम से बच्चों व स्थानीय जनमानस को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया और समाज को एकजुट होकर इससे लड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व जेएनयू प्रोफेसर डॉ. वरयाम सिंह ने की। उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को बचाना है, तो समाज के हर वर्ग को नशे के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने चेताया—“चिट्टा बीमारी की तरह है, जो व्यक्ति को अंदर से खत्म कर देता है, मगर इसका उपचार संभव है यदि समय रहते जानकारी मिले।”

उन्होंने समाज से अपील की कि चिट्टे जैसे नशे के अवैध कारोबार पर स्थानीय लोग सतर्क नजर रखें, ताकि इसका फैलाव रोका जा सके।

कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के बच्चे, अध्यापक, स्थानीय लोग तथा हिमालय बचाओ समिति के अध्यक्ष गुमान ठाकुर, देशराज नेगी, हीरालाल ठाकुर, विक्रमू नेगी, और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टेढ़ी सिंह नेगी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसी क्रम में उपमंडल बंजार की ग्राम पंचायत पलाहच में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहाँ स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान संजीव कुमार ने युवाओं को सांस्कृतिक, खेलकूद व रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि उन्हें नशे से दूर रखा जा सके।


कार्यक्रम में कला जत्थे ने संगीत, नाटक और प्रभावशाली संदेशों के माध्यम से बच्चों व स्थानीय जनमानस को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया और समाज को एकजुट होकर इससे लड़ने का आह्वान किया।

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