फ्रंट पेज न्यूज़ कुल्लू।
जिले में बढ़ती नशे की समस्या को जड़ से खत्म करने के मकसद से जिला स्तरीय नार्को समन्वय समिति (एनकॉर्ड) की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को उपायुक्त तोरुल एस रवीश की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में पुलिस अधीक्षक, उपमंडलाधिकारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग सहित सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान नशा तस्करी और नशीली दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए व्यापक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
“सिर्फ सप्लाई रोकना काफी नहीं… डिमांड कम करना भी उतना ही ज़रूरी” — उपायुक्त
उपायुक्त तोरुल एस रवीश ने बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशे की रोकथाम का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब आपूर्ति पर नियंत्रण के साथ-साथ मांग को कम करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएँ।
उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों, आईटीआई समेत सभी शिक्षण संस्थानों में नियमित निगरानी, जागरूकता कार्यक्रम, और युवाओं में नशे के दुष्प्रभावों की वास्तविक जानकारी पहुँचाने पर जोर दिया।
DC ने निर्देश दिए कि अधिकारी और पुलिस कर्मचारी गोद लिए गए स्कूलों का नियमित दौरा करें।
छात्रों को एनडीपीएस एक्ट, नशे के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव और सकारात्मक जीवनशैली के बारे में जागरूक करें।
किसी भी संस्था में नशे से संबंधित गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य विभाग को मिलेगा खास रोल — मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष अभियान
उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को युवाओं में मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि तनाव, अवसाद और अकेलेपन जैसे मानसिक पहलू अक्सर युवाओं को नशे की ओर धकेलते हैं, इसलिए उन पर ध्यान देना बेहद आवश्यक है।
“यह सिर्फ प्रशासनिक लड़ाई नहीं, सामाजिक आंदोलन बने”
DC ने उपस्थित सभी विभागों से आग्रह किया कि नशा-नियंत्रण केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान बनना चाहिए। युवाओं, शिक्षकों, अभिभावकों, महिला मंडलों और स्वयंसेवी संस्थाओं को इस मुहिम में सक्रिय रूप से जोड़ने की अपील की गई।
पुलिस अधीक्षक का संदेश — “कुल्लू को नशा मुक्त बनाना लक्ष्य नहीं, संकल्प है”
बैठक में पुलिस अधीक्षक मदन लाल ने कहा कि पुलिस प्रशासन जिले को नशामुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने साफ कहा कि नशे से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तस्करों पर सख्त कार्रवाई, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और जन-सहभागिता को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

















