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नंगल-ऊना-तलवाड़ा-मुकेरियां रेल लाइन में देरी पर अनुराग ठाकुर का तीखा सवाल, राज्यों के सहयोग की कमी से अटकी परियोजना

फ्रंट पेज न्यूज़ हमीरपुर।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित नंगल-ऊना-तलवाड़ा-मुकेरियां ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना में लगातार हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह परियोजना केवल एक सामान्य रेल संपर्क नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की रणनीतिक आधारभूत संरचना है, जो उत्तर भारत के संवेदनशील क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर सकती है। बावजूद इसके, हिमाचल प्रदेश और पंजाब सरकारों के अपर्याप्त सहयोग के कारण यह परियोजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई है।

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अनुराग ठाकुर ने बताया कि रेल मंत्रालय के लिखित उत्तर में भी यह बात सामने आई है कि भूमि अधिग्रहण में कमी, आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों में देरी और भूमि हस्तांतरण की धीमी प्रक्रिया इस परियोजना की प्रगति को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि कुल 278 हेक्टेयर भूमि में से अभी तक केवल 189 हेक्टेयर का ही अधिग्रहण हो पाया है, जो प्रशासनिक सुस्ती और समन्वय की कमी को उजागर करता है।

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उन्होंने आगे कहा कि नंगल डैम से लेकर ऊना-अंदौरा और दौलतपुर चौक तक का रेल खंड सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और यहां तक कि वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें भी चल रही हैं। लेकिन दौलतपुर चौक से कारटोली और तलवाड़ा तक का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। कारटोली-तलवाड़ा खंड पर अभी तक मात्र 25 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है, जो परियोजना के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाता है।

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तलवाड़ा से मुकेरियां खंड की बात करें तो यहां प्रमुख पुल संरचनाओं में लगभग 70 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है, लेकिन वन स्वीकृतियों और भूमि संबंधी अड़चनों ने इस काम को भी प्रभावित किया है। विशेष रूप से होशियारपुर जिले में 132 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन से जुड़े मामलों का लंबित होना इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बनकर उभरा है।
अनुराग ठाकुर ने इस परियोजना की अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह रेल लाइन पठानकोट-जम्मू मार्ग का एक मजबूत विकल्प बन सकती है और पंजाब के कांडी क्षेत्र के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के ऊना और हमीरपुर जैसे क्षेत्रों को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने रेलवे अवसंरचना के विकास के लिए अपने बजट में ऐतिहासिक वृद्धि की है। वर्ष 2009-14 के दौरान जहां पंजाब को औसतन 225 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष मिलते थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 5,421 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो केंद्र की स्पष्ट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसके बावजूद, संबंधित राज्य सरकारों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई और आग्रह किया कि भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृतियों और मुआवजा वितरण से जुड़े सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द निपटाया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र, रेलवे और दोनों राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ एक संयुक्त निगरानी तंत्र बनाया जाए, जो हर पखवाड़े बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा करे और तय समयसीमा में कार्य को पूरा सुनिश्चित करे।
अंत में अनुराग ठाकुर ने कहा कि हमीरपुर, ऊना और पूरे हिमालयी क्षेत्र के लोगों को बेहतर और आधुनिक रेल संपर्क उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते सभी अड़चनों को दूर नहीं किया गया, तो यह महत्वपूर्ण परियोजना प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ सकती है, जिसका खामियाजा क्षेत्र के लाखों लोगों को भुगतना पड़ेगा।

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