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जिले को मोतियाबिंद मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम, उपायुक्त ने सर्जरी और फॉलोअप व्यवस्था के दिए निर्देश

फ्रंट पेज न्यूज कुल्लू।
जिले को मोतियाबिंद मुक्त भारत अभियान के तहत अंधता से मुक्त करने की दिशा में प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है। इसी कड़ी में वीरवार को उपायुक्त तोरुल एस रवीश की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मोतियाबिंद से पीड़ित वरिष्ठ नागरिकों की पहचान, सर्जरी और उपचार व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।


बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जिले में मोतियाबिंद के कारण दृष्टिहीनता का सामना कर रहे वरिष्ठ नागरिकों की पहले स्क्रीनिंग की जाएगी और उसके बाद चिन्हित रोगियों की चरणबद्ध रूप से सर्जरी करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सर्जरी के दौरान रोगियों को उत्तम गुणवत्ता के आंखों के लेंस लगाए जाएंगे, ताकि उन्हें दीर्घकालिक लाभ मिल सके और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो।


उपायुक्त ने जिला कल्याण अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि मोतियाबिंद से पीड़ित रोगियों की सर्जरी का सुस्पष्ट कार्यक्रम तैयार किया जाए और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि सर्जरी के दौरान ही नहीं, बल्कि सर्जरी के बाद भी नियमित फॉलोअप, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कोई कमी न रहे।
बैठक का संचालन करते हुए गिरधारी लाल शर्मा, जिला कल्याण अधिकारी ने जानकारी दी कि कल्याण विभाग द्वारा जिले में गैर सरकारी संस्था ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी के माध्यम से मोतियाबिंद से होने वाली अंधता की पहचान के लिए विशेष स्क्रीनिंग शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में अब तक 19 वरिष्ठ नागरिकों को मोतियाबिंद से पीड़ित पाया गया है। सभी चिन्हित लाभार्थियों की विस्तृत सूची तैयार कर ली गई है, जिनकी सर्जरी चरणबद्ध ढंग से करवाई जाएगी।


उन्होंने बताया कि वर्तमान चरण में 12 मोतियाबिंद रोगियों की सर्जरी के लिए धनराशि की स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे जल्द ही सर्जरी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
बैठक में डॉ. रणजीत ठाकुर, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुरेश, ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी के दीपक शर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
प्रशासन की इस पहल से जिले के वरिष्ठ नागरिकों को न केवल बेहतर दृष्टि मिलने की उम्मीद जगी है, बल्कि मोतियाबिंद मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम भी माना जा रहा है।

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