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सरकारी गाइडलाइन या गरीब-विरोधी नीति? हिमाचल में बीपीएल परिवारों की ऐतिहासिक छंटनी

फ्रंट पेज न्यूज़ कांगड़ा।

प्रदेश में बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) और अंत्योदय परिवारों की पहचान को लेकर सरकार की प्रक्रिया अब बड़े विवाद का कारण बनती जा रही है। हालिया छंटनी में 90 प्रतिशत से अधिक परिवारों को बीपीएल सूचियों से बाहर कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता, आक्रोश और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
दरअसल, अधिकांश पंचायतों में ग्राम सभा का कोरम पूरा न हो पाने के कारण सरकार तय समय-सीमा में बीपीएल सूचियों को अंतिम रूप नहीं दे सकी। मार्च 2025 में जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया था कि 15 अक्तूबर 2025 तक बीपीएल सूचियों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया अधूरी रह गई।


ग्राम सभा के बिना बनी खंड स्तरीय कमेटी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने ग्राम सभा की सिफारिश के बिना ही बीपीएल सूचियों को अंतिम रूप देने के लिए खंड स्तरीय कमेटियों का गठन कर दिया। इन कमेटियों में संबंधित एसडीएम को अध्यक्ष, जबकि बीडीओ और पंचायत इंस्पैक्टर को सदस्य बनाया गया। पंचायत सचिव, पटवारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अनुशंसा के आधार पर आवेदनों की जांच की गई।
इस कमेटी को 31 दिसम्बर 2025 तक बीपीएल सूचियों को अंतिम रूप देने का अधिकार दिया गया। इसी कड़ी में बुधवार को जसवां–प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र में आवेदनों की जांच के बाद बड़ा फैसला सामने आया।
जसवां–प्रागपुर में 2959 परिवार बाहर
खंड स्तरीय कमेटी की जांच में जसवां–प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र से बीपीएल सूची में शामिल होने के लिए आए आवेदनों में से केवल 278 परिवार ही सरकारी गाइडलाइन के अनुसार पात्र पाए गए। इसके विपरीत 2959 परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर कर दिया गया, जो पहले इस श्रेणी में दर्ज थे।
देहरा क्षेत्र में भी भारी कटौती
देहरा विधानसभा क्षेत्र में स्थिति और भी चौंकाने वाली रही। यहां पहले 3946 परिवार बीपीएल और अंत्योदय सूची में दर्ज थे, लेकिन नई जांच के बाद 3751 परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया। एसडीएम देहरा की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने केवल 195 परिवारों को ही बीपीएल के योग्य माना।
पंचायत प्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
जंडौर पंचायत के प्रधान सुरेश ठाकुर, वणी पंचायत की प्रधान बिंदु ठाकुर और घियोरी पंचायत की प्रधान पूनम धीमान ने चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जटिल और सख्त शर्तों के कारण लगभग 90 प्रतिशत परिवार बीपीएल सूची से बाहर हो गए हैं।
घियोरी पंचायत की प्रधान पूनम धीमान ने बताया कि उनकी पंचायत में कुल 182 परिवारों में से सिर्फ 5 परिवार ही बीपीएल सूची में चयनित हो पाए, जो ग्रामीण हकीकत से मेल नहीं खाता।
अधिकारियों का पक्ष
इस मामले पर खंड विकास अधिकारी परागपुर अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि चयन पूरी तरह सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार किया गया है और 278 परिवार ही पात्र पाए गए। वहीं, देहरा के समाज शिक्षा एवं खंड योजना अधिकारी संजीव कुमार ने भी बताया कि देहरा क्षेत्र में 195 परिवारों को नियमानुसार बीपीएल सूची में शामिल किया गया है।
गरीबी की परिभाषा पर सवाल
बीपीएल सूची से इतने बड़े पैमाने पर परिवारों का बाहर होना सिर्फ एक प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह ग्रामीण गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं, राशन, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित होने का खतरा भी है। सवाल यह है कि क्या मौजूदा गाइडलाइन जमीनी हकीकत को सही मायनों में दर्शाती है, या फिर गरीब परिवार कागजी शर्तों की भेंट चढ़ते जा रहे हैं।

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