अगस्त 2024 से लटक रहा समाधान, अधिक लोड और कमजोर सिस्टम से ग्रामीण बेहाल — नए ट्रांसफार्मर का मिला फिर से आश्वासन
फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार( परसराम भारती)
तीर्थन घाटी के गुशैनी-बंजार क्षेत्र की दूरदराज ग्राम पंचायत मशयार इन दिनों बिजली संकट का प्रतीक बन चुकी है। पंचायत के अंतर्गत आने वाले कमेड़ा, मंझली और मशयार गांव पिछले कई दिनों से लगातार बिजली की आंख-मिचौली से परेशान हैं। कभी घंटों बिजली गुल रहती है तो कभी लो वोल्टेज के कारण घरों में बल्ब तक ठीक से नहीं जल पाते। यह समस्या अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के रोजमर्रा के जीवन और आजीविका पर सीधा असर डाल रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि मंझली गांव में लगा ट्रांसफार्मर अगस्त 2024 से ही पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। यह ट्रांसफार्मर लंबे समय से केवल दो फेज पर चल रहा है, जबकि इस पर लोड लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब इसी ट्रांसफार्मर से एक निजी मोबाइल कंपनी एयरटेल का टावर भी संचालित किया जा रहा है। नतीजा यह है कि तीनों गांवों के करीब 100 से अधिक घरों का पूरा भार एक कमजोर ट्रांसफार्मर पर टिका हुआ है, जो अब अपनी क्षमता से कहीं अधिक दबाव झेल रहा है।

इसका सीधा असर ग्रामीणों के घरेलू और आर्थिक जीवन पर पड़ रहा है। लो वोल्टेज के चलते घरों में जरूरी उपकरण जैसे मथानी, पानी की मोटर और अन्य मशीनें ठीक से काम नहीं कर पा रही हैं। दूध से घी बनाने जैसे पारंपरिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की आमदनी पर असर पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, घर के कामकाज और रोजमर्रा की जरूरतें—सब कुछ इस अनिश्चित बिजली आपूर्ति के कारण अस्त-व्यस्त हो चुका है।
स्थानीय लोगों में इस समस्या को लेकर भारी नाराजगी है। प्रकाश ठाकुर (पूर्व उपप्रधान), लाल चंद कारदार, हेत राम, हीरा लाल, अमर भारती, दिलीप सिंह, गोपाल कृष्ण, दरबारी लाल, धर्म चंद, उत्तम राम, राम कृष्ण और डूर सिंह सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मुद्दे को कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं। लिखित शिकायतें, मौखिक निवेदन, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया—हर माध्यम से अपनी बात रखी गई, लेकिन समाधान के नाम पर केवल अस्थायी मरम्मत ही की गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग हर बार ट्रांसफार्मर को ठीक करने का अस्थायी उपाय करता है, लेकिन मूल समस्या जस की तस बनी रहती है। उनका साफ कहना है कि अब मरम्मत नहीं, बल्कि उच्च क्षमता वाले नए ट्रांसफार्मर की स्थापना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
वहीं, इस मामले पर विद्युत विभाग उपमंडल बंजार के सहायक अभियंता शशिकांत ने बताया कि समस्या उनके संज्ञान में है और मशयार के लिए नए ट्रांसफार्मर की व्यवस्था कर ली गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर उच्च क्षमता वाला नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया जाएगा।
हालांकि, ग्रामीण इस आश्वासन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे पहले भी कई बार ऐसे वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। ऐसे में अब लोगों की उम्मीदें केवल शब्दों से नहीं, बल्कि वास्तविक काम से जुड़ी हैं। जब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगता, तब तक मशयार के इन गांवों में अंधेरे और असुविधा का यह सिलसिला थमने वाला नहीं है।












