फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार (कुल्लू)।
सिराज क्षेत्र की आस्था, परंपरा और देव संस्कृति का साक्षात् प्रतीक माने जाने वाले महर्षि मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी के नए रथों की प्राण प्रतिष्ठा (पूज) का भव्य आयोजन 9 जनवरी को संपन्न होगा। यह पावन देव कार्य कई वर्षों बाद होने जा रहा है, जिसे लेकर समूचे क्षेत्र में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
इस अवसर पर मार्कंडेय ऋषि पेड़चा सैकड़ों हारियानों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विशेष पूज विधि का निर्वहन करेंगे। देव कार्य का शुभारंभ सायंकालीन समय में परिक्रमा सहित पूज कार्यक्रम के साथ होगा, जिसमें दोनों देव शक्तियाँ—ऋषि और माता—अपने-अपने रथों में विराजमान होकर हारियानों साथ क्षेत्र की परिक्रमा करेंगे
मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी (वल्ले दूर्गा)के कारदार चेतन शर्मा ने बताया कि देव आज्ञा के अनुसार रथ निर्माण हेतु लकड़ी लगभग पाँच वर्ष पूर्व निकाली गई थी, जिसे विधिपूर्वक सुरक्षित रखा गया। अब देव आदेशानुसार दोनों रथों का निर्माण कार्य पूर्ण हो रहा है और 9 जनवरी को इनकी विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन में मार्कंडेय ऋषि पेड़चा सहित विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 40 देवताओं के देबलुओं को निमंत्रण दिया गया है। आयोजन में 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
एक मंदिर, एक कोठी, एक परंपरा—विशिष्ट पहचान
उल्लेखनीय है कि कुल्लू जिला के उपमंडल बंजार के सिराज क्षेत्र में स्थित बला गांव में विराजमान मार्कंडेय ऋषि और माता त्रिपुरा बाला सुंदरी का संयुक्त मंदिर, उपमंडल मुख्यालय से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए जाना जाता है, जहाँ दोनों देव शक्तियों के स्थान, मंदिर और कोठी एक ही संयुक्त रूप में है।
बलागाड़ पंचायत के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजित ये दोनों देवता प्रत्येक देव कार्य में साथ-साथ विराजमान रहते हैं। यूँ कहा जाए कि दोनों रथ एक-दूसरे के पर्याय हैं, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हारियान चाहे किसी भी रथ से देव प्रश्न करें, मान्यता एक ही मानी जाती है।
वर्ष भर रहती है भक्तों की भीड़
बला मंदिर परिसर वर्ष भर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है। यहाँ प्रतिवर्ष भादो और वैशाख माह में दो हुम (जागरे) आयोजित होते हैं। इसके अतिरिक्त 5 फाल्गुन को मनाया जाने वाला बलात्वार और 10 वैशाख को होने वाला झीहरू उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचकर देव दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
9 जनवरी को होने जा रही यह रथ प्राण प्रतिष्ठा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह सिराज क्षेत्र की जीवंत देव संस्कृति, सामूहिक आस्था और परंपरागत विरासत का भव्य उत्सव भी है, जो आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं की स्मृतियों में अमिट रहेगा।












