फ्रंट पेज न्यूज़। बंजार
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में मंत्रियों, विधायकों और चेयरमेनों के वेतन व सुविधाओं में हुई बढ़ोतरी ने आम जनता की नाराज़गी को और भड़का दिया है। महंगाई से पहले ही पस्त लोग अब सरकार द्वारा मंत्रियों को दी जा रही नई रियायतों और बढ़े हुए भत्तों पर सीधा सवाल उठा रहे हैं। जनता का कहना है कि जब आम आदमी को राहत देने की बात आती है, तब फाइलें धूल फांकती रहती हैं, लेकिन नेताओं की सुविधाओं के लिए फैसले पलभर में हो जाते हैं।
ताज़ा फैसले के मुताबिक, मंत्रियों को सड़क मार्ग से यात्रा करने पर प्रति किलोमीटर 18 रुपये के बजाय अब 25 रुपये माइलेज भत्ता मिलेगा। वहीं दौरे या यात्रा के दौरान मिलने वाला भत्ता 1800 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है। आम नागरिकों का आरोप है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब आम जनता रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है।
● “एकरूपता होती तो जनता की तकलीफ़ें पहले देखी जाती” — डॉ. वरयाम सिंह

जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ. वरयाम सिंह कहते हैं कि नीति और नीयत दोनों में एकरूपता दिखाई नहीं देती। “जब बात अपनी सुविधाओं की आती है, तो सब मिलकर उसे बढ़ा लेते हैं, लेकिन जब जनता या अन्य वर्गों की बारी आती है, तो अनदेखी की जाती है। यह दोहरा रवैया ही जनता में अविश्वास बढ़ा रहा है।”
● “पढ़े-लिखे युवाओं को 4–5 हज़ार की नौकरी, खुद के लिए ऊँचे वेतनमान” — भावना चौहान

कामगार संगठन बंजार की अध्यक्ष भावना चौहान ने कड़ा सवाल उठाया। उनका कहना है, “आज पढ़े-लिखे युवाओं को चार-पांच हज़ार की आउटसोर्स नौकरी दी जाती है। उनके भविष्य की किसी को चिंता नहीं। लेकिन अपने लिए नेता ऊँचे वेतनमान और सभी सुविधाएँ जुटा लेते हैं। यह अन्याय कब तक चलेगा?”
● “जिसकी लाठी, उसकी भैंस” — टेकराम ठाकुर

स्थानीय व्यापारी टेकराम ठाकुर का कहना है कि यह निर्णय कोई नई बात नहीं है। “जिसकी लाठी, उसकी भैंस। जब सारी शक्तियाँ उनके पास हैं, तो मनमानी तो करेंगे ही। जनता की सुनवाई कौन करे?”
● “खुद पर फैसले खुद ही, इसमें आश्चर्य कैसा?” — पूर्व प्रिंसिपल हीरालाल ठाकुर

पूर्व प्रिंसिपल हीरालाल ठाकुर का कहना है कि इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। “फैसले वही करेंगे जिन पर फैसले लागू नहीं होते। अपने लिए ही करना है, तो किससे पूछेंगे? यह वर्षों से चली आ रही व्यवस्था का स्वाभाविक परिणाम है।”

● “जनता महंगाई से त्रस्त, मंत्री सुविधाएँ बढ़ाने में मस्त” — पूर्व प्रधान बुधी सिंह

पूर्व पंचायत प्रधान बुधी सिंह ने जनता की पीड़ा को आवाज़ दी। उनका कहना है, “जनता महंगाई की मार झेल रही है। रसोई गैस, राशन, दवाइयाँ, पढ़ाई—सब महंगा हो चुका है। लेकिन हमारे मंत्री लोग अपनी सुविधाएँ बढ़ाने में ही मस्त हैं। जनता की भावनाएँ पूरी तरह अनदेखी की जा रही हैं।”
जनता का ग़ुस्सा बढ़ रहा, जवाब किसी के पास नहीं
वेतन बढ़ोतरी से पहले ही जनता में असंतोष था, लेकिन अब जो अतिरिक्त सुविधाएँ दी गई हैं, उसने आम लोगों की नाराज़गी को और तेज़ कर दिया है। जनता का कहना है कि सरकार अगर जनता के लिए भी उतनी ही तत्परता दिखाती जितनी अपने लिए दिखाती है, तो हालात कुछ और होते।
फ़िलहाल जनता सवाल पूछ रही है, लेकिन जवाब देने वाला कोई सामने नहीं दिख रहा।














