फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।
राजकीय महाविद्यालय बंजार में प्राध्यापकों की लगातार घटती संख्या अब एक गंभीर शैक्षणिक संकट का रूप ले चुकी है, जिसका सीधा असर क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति विज्ञान संकाय की है, जहाँ रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री) विषय में पिछले पाँच वर्षों से कोई भी प्राध्यापक नियुक्त नहीं हुआ, जिससे साइंस विभाग लगभग जर्जर अवस्था में पहुँच गया है। हाल ही में अंग्रेज़ी और संस्कृत विषय के प्राध्यापकों के स्थानांतरण ने समस्या को और भी विकराल बना दिया है, जबकि ये दोनों विषय आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस—तीनों संकायों में अनिवार्य एवं वैकल्पिक रूप से पढ़ाए जाते हैं

और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने इन्हें मेजर विषय के रूप में चुना है। ऐसे हालात में वार्षिक परीक्षाओं के आयोजन और शैक्षणिक सत्र 2026-27 के सुचारू संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आंकड़े भी स्थिति की भयावहता बयां करते हैं—जहाँ सत्र 2024-25 में विद्यार्थियों की संख्या लगभग 875 थी, वहीं वर्तमान में यह घटकर करीब 650 रह गई है। इसके साथ ही इग्नू विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र भी बंजार से स्थानांतरित होने की कगार पर बताया जा रहा है, जिससे दूरदराज़ के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर और सीमित हो सकते हैं।

इस पूरे मुद्दे पर सेवानिवृत्त सह-प्राध्यापक डॉ. जोगिंदर ठाकुर ने कहा कि अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक है और परीक्षाओं को देखते हुए वे अभिभावकों के साथ मिलकर डेपुटेशन के माध्यम से स्टाफ भरने का प्रयास करेंगे,

वहीं अभिभावक एवं उप-प्रधान ग्राम पंचायत सजवाड़ विजय कुमार ने लंबे समय से पद खाली रहने को बच्चों के भविष्य के लिए घातक बताया।
पी टी ए प्रधान मोर सिंह का कहना कि बच्चों की पढ़ाई स्टाफ न होने से प्रभावित हो रही है सरकार रिक्त पदों को समय रहते भरे और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो।

महाविद्यालय के प्राचार्य राजेश कुमार सिंह ने कहा कि स्टाफ की कमी से जुड़ी पूरी जानकारी मासिक रिपोर्ट के माध्यम से सरकार के संज्ञान में लाई जा रही है और उन्हें उम्मीद है कि शीघ्र ही पद भरे जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न




























