हिमाचल प्रदेश में नई आबकारी व्यवस्था के तहत क्यूआर कोड प्रणाली लागू कर दी गई है। सरकार का दावा है कि अब शराब की हर बोतल पर क्यूआर कोड होगा, जिससे नकली शराब और ओवरचार्जिंग पर पूरी तरह रोक लगेगी। यानी अब बोतल खुद ही अपनी सच्चाई और कीमत बताएगी—“मुझसे ज्यादा मत वसूलो!”

लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नीति लागू हुए चार से पांच दिन बीत चुके हैं, नीलामी प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, मगर जिला कुल्लू और उपमंडल बंजार के कई क्षेत्रों में अभी तक शराब के ठेके नहीं खुल पाए हैं।
ऐसे में शराब के शौकीनों के लिए यह स्थिति किसी छोटे-मोटे “अनौपचारिक लॉकडाउन” से कम नहीं लग रही। जहां एक ओर सरकार व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता यह सोचने को मजबूर हैं कि आखिर यह इंतजार कब खत्म होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट समयसीमा दी गई है और न ही यह बताया जा रहा है कि ठेके कब तक पूरी तरह संचालित हो पाएंगे। ऐसे में “चार दिन की चांदनी” वाली कहावत यहां उलटी पड़ती दिख रही है—चार-पांच दिन बीत गए, मगर ‘रौशनी’ (ठेकों की) अभी भी गायब है।


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व्यंग्यात्मक तौर पर देखें तो हालात कुछ ऐसे हैं कि नई नीति ने नकली शराब पर तो लगाम लगा दी, लेकिन असली शराब तक पहुंच भी फिलहाल ‘कंट्रोल’ में कर दी है।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या यह इंतजार कुछ और दिन चलेगा, या फिर शौकीनों को जल्द ही राहत मिलेगी?
फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है… और बंजार-कुल्लू में ‘सूखा दौर’ जारी है।











