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डर नहीं, पारदर्शिता का नाम है स्मार्ट मीटर: बाधा डालने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई – बिजली बोर्ड

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फ्रंट पेज न्यूज़ कुल्लू।
हिमाचल प्रदेश में बिजली व्यवस्था को पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता-हितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव तेज़ी से लागू हो रहा है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड भुंतर के सहायक अभियंता अमन कुमार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश भर में पुराने बिजली मीटरों को चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटरों से बदला जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार के आदेशों के तहत की जा रही है और इसमें किसी भी तरह की मनमानी या जबरदस्ती नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था सुधार का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि अब तक सभी ट्रांसफार्मरों, सरकारी कार्यालयों, उपक्रमों और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के मीटर बदले जा चुके हैं और अब यह प्रक्रिया घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुँच रही है। स्मार्ट मीटर का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि बिलिंग सिस्टम को अधिक सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है, ताकि अनुमान या गड़बड़ी की गुंजाइश ही न रहे।
हालांकि, विभाग के संज्ञान में यह बात आई है कि कुछ घरेलू उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध कर रहे हैं। उनकी आशंका है कि स्मार्ट मीटर से बिजली का बिल ज्यादा आएगा। इस पर सहायक अभियंता अमन कुमार ने दो टूक कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। स्मार्ट मीटर न तो अतिरिक्त यूनिट जोड़ता है और न ही मनमाने ढंग से रीडिंग बढ़ाता है, बल्कि यह वास्तविक खपत के आधार पर सटीक रीडिंग दर्ज करता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल असामान्य रूप से अधिक लगता है, तो वह तुरंत अपने संबंधित विद्युत कार्यालय में शिकायत दर्ज कर सकता है। विभाग द्वारा जांच के बाद यदि कोई तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उसे नियमानुसार तुरंत ठीक किया जाएगा।
लेकिन इसके साथ ही विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह भी कहा है कि यदि कोई उपभोक्ता मीटर बदलने आए कर्मचारियों को कार्य करने से रोकता है, या सरकारी कार्य में बाधा डालता है, तो इसे नियमों के तहत सरकारी काम में बाधा माना जाएगा और ऐसे मामलों में उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए संबंधित उपभोक्ता स्वयं जिम्मेदार होगा।
कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर केवल एक नई मशीन नहीं, बल्कि बिजली व्यवस्था में ईमानदारी और पारदर्शिता की ओर एक जरूरी कदम है। इसे संदेह की नजर से देखने के बजाय, उपभोक्ताओं को इसे अपनी सुविधा और अधिकारों की सुरक्षा के रूप में समझना चाहिए।

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