फ्रंट पेज न्यूज़ कुल्लू।
जहां अस्पताल जीवन बचाने की आख़िरी उम्मीद होते हैं, वहीं अगर उसी परिसर में मिलने वाला खाना ही जानलेवा बन जाए, तो यह बेहद गंभीर मामला है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की कैंटीन से सामने आई घटना ने अस्पताल प्रशासन और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मासूम को खिलाया परांठा, निकले शीशे
25 दिसंबर की सुबह बंजार क्षेत्र के सजवाड़ गांव निवासी गुमत राम अपने एक साल के बीमार बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल लाए थे। बच्चे के लिए कैंटीन से लाए गए परांठे में आधा खिलाने के बाद शीशे के टुकड़े दिखाई दिए। परिजन घबरा गए और तुरंत खाना बंद कराया।
परिजनों की चिंता, संतोषजनक जवाब नहीं
परिजन शिकायत लेकर सीधे कैंटीन पहुंचे, लेकिन आरोप है कि कर्मचारियों की ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला। परिवार इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि कहीं शीशे का कोई टुकड़ा बच्चे के पेट में न चला गया हो।
पहले भी विवादों में रही कैंटीन
यह पहली शिकायत नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल की कैंटीन और मेस में खाने में कॉकरोच मिलने जैसे मामले सामने आ चुके हैं। बावजूद इसके, ठोस कार्रवाई न होने से लापरवाही जारी है।
एक ही ठेकेदार के पास कैंटीन और मेस
जानकारी के अनुसार, अस्पताल की कैंटीन और मेस दोनों का संचालन एक ही ठेकेदार के पास है। बार-बार की शिकायतें यह सवाल उठाती हैं कि मरीजों और तीमारदारों की सेहत को लेकर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जा रही।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तारा चंद ने कहा कि फिलहाल मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर ठेकेदार को बुलाकर जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सवाल साफ है:
जब अस्पताल की कैंटीन में ही सुरक्षित भोजन की गारंटी नहीं, तो मरीजों और उनके परिजनों की सेहत की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
मुख्य चित्र एआई निर्मित




























