फ्रंट पेज न्यूज़ कुल्लू।
जिले में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जिला प्रशासन ने ठोस एवं प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को लेकर कमर कस ली है। शनिवार को उपायुक्त तोरुल एस. रवीश की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तार से मंथन किया गया।
बैठक का प्रमुख फोकस राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा पारित आदेशों की सख्ती से अनुपालना रहा। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के तहत वैकल्पिक, वैज्ञानिक और प्रभावी व्यवस्थाएं हर हाल में सुनिश्चित की जाएं। इसके लिए जिला पर्यावरण समिति के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कचरे के संग्रहण, प्रसंस्करण और निस्तारण की व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
कसोल एमआरएफ साइट और मणिकरण क्षेत्र की व्यवस्था की समीक्षा
बैठक में कसोल स्थित एमआरएफ (Material Recovery Facility) साइट के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही साडा (SADA) मणिकरण क्षेत्र में ठोस कचरे के संग्रहण व निस्तारण की वर्तमान स्थिति, कचरा डंपिंग के हॉट-स्पॉट्स पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रगति और नियमों की अनुपालना पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
उपायुक्त ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है और कचरे का वैज्ञानिक, नियमसम्मत एवं समयबद्ध प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। लापरवाही पर जिम्मेदारी तय करने के संकेत भी दिए गए।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (PWMU)
ग्रामीण इलाकों में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न विकास खंडों में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (PWMU) स्थापित करने हेतु उपयुक्त स्थलों पर विचार-विमर्श किया गया। उपायुक्त ने चिन्हित स्थलों पर वन संरक्षण अधिनियम (FCA) और वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत आवश्यक स्वीकृतियों की स्थिति की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में एडीसी अश्वनी कुमार, एसडीएम निशांत ठाकुर, टीसीपी घनश्याम कुमार, डीपीओ दया राम ठाकुर सहित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्षतः, जिला प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि कचरा प्रबंधन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर दायित्व है—जिसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ठोस व प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर प्रशासन सख्त, एनजीटी आदेशों की अनुपालना पर उपायुक्त की दो टूक














