फ्रंट पेज न्यूज़ कुल्लू।
केंद्रीय बजट 2026–27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए Himalaya Niti Abhiyan के संयोजक Guman Singh ने कहा है कि यह बजट मूलतः कॉरपोरेट हितों को साधने वाला, इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास केंद्रित दस्तावेज़ है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, किसान और ग्रामीण समाज के लिए कोई ठोस दृष्टि नजर नहीं आती, साथ ही इससे केंद्र–राज्य संबंधों में तनाव और गहराने की आशंका है; उन्होंने कहा कि पूरे बजट भाषण में ‘किसान’ शब्द तक का उल्लेख न होना और ग्रामीण विकास पर गंभीर चर्चा का अभाव इस बात का प्रमाण है कि खेती को केवल एग्रोनॉमी और कृषि-वाणिज्य के चश्मे से देखा गया है, जिससे यह बजट जनता-विरोधी और कॉरपोरेट पोशाक में लिपटा प्रतीत होता है; Himachal Pradesh, Jammu and Kashmir और Uttarakhand में घोषित ‘सस्टेनेबल माउंटेन टूरिज्म ट्रेल्स’ को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि इनकी वास्तविक परिभाषा क्या है और इनके पर्यावरणीय व सामाजिक प्रभावों का आकलन कहाँ है, क्योंकि बिना स्पष्ट जानकारी के ऐसी योजनाएँ हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं; अखरोट, बादाम और चिलगोजे की खेती बढ़ाने की घोषणा को भी उन्होंने अव्यावहारिक बताते हुए आशंका जताई कि कहीं यह पहाड़ी राज्यों की भूमि को पर्यटन और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए खोलने की भूमिका तो नहीं है; भारत–न्यूज़ीलैंड टैरिफ समझौते के बाद सेब की कीमतों में संभावित गिरावट और यूरोपीय संघ के साथ समझौतों के बाद कृषि व बीज कानूनों में बदलाव की पृष्ठभूमि में हिमाचल के सेब व अन्य फल उत्पादकों के हितों की रक्षा को लेकर बजट की चुप्पी को उन्होंने चिंताजनक बताया; सबसे गंभीर मुद्दे के रूप में 75 वर्षों से विशेष श्रेणी राज्यों को मिल रहे रेवेन्यू डिफिसिट ग्रांट (RDG) को 16वें वित्त आयोग द्वारा समाप्त किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इससे हिमाचल को हर वर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान होगा; हिमालय नीति अभियान के संयोजक ने यह भी स्पष्ट किया कि बजट से पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर हिमालय क्षेत्र के लिए विशेष बजटीय प्रावधानों की मांग की गई थी ताकि जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके, लेकिन बजट में न तो आपदा प्रबंधन के लिए कोई विशेष व्यवस्था की गई और न ही इस वर्ष आई आपदाओं पर घोषित राहत का उल्लेख किया गया, जो हिमालयी क्षेत्रों की लगातार उपेक्षा को उजागर करता
केंद्रीय बजट 2026–27: हिमालय की ज़रूरतें हाशिये पर, कॉरपोरेट प्राथमिकताओं को बढ़ावा—हिमालय नीति अभियान
On: February 2, 2026 6:20 PM




























