फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर आज 10 दिसंबर 2025 को राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय बंजार की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा एक विशेष ऑनलाइन व्याख्यान कार्यक्रम बड़े गरिमा व उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मानवाधिकारों के वैश्विक संदर्भ में करुणा, शांति और मानवीय मूल्यों की व्यापक समझ विकसित करना था। दोपहर बाद महाविद्यालय के सम्मेलन कक्ष में शुरू हुए इस विचार-गोष्ठी में “करुणा के प्रतीक: परमपावन 14वें दलाई लामा जी” विषय पर गहन और प्रेरक व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।

इस विशेष व्याख्यान के मुख्य वक्ता थे—गेशे (डॉ.) कैलाश चंद्र बौद्ध, जो एक जाने-माने शिक्षाविद, भाषाविद, अनुवादक और तिब्बती अध्ययन के विद्वान हैं। वे परमपावन दलाई लामा जी के हिंदी अनुवादक भी हैं, इसलिए उन्होंने विषय को अत्यंत आत्मीयता और अनुभूति के साथ प्रस्तुत किया। आभासी माध्यम से जुड़कर उन्होंने मानवाधिकार दिवस के ऐतिहासिक महत्व को समझाते हुए बताया कि दलाई लामा जी का जीवन और दर्शन विश्व शांति, करुणा और मानवता के सर्वोच्च मूल्यों के प्रतीक हैं। उन्होंने दलाई लामा जी की प्रतिबद्धताओं—मानव कल्याण, धर्मों के बीच सौहार्द, वैश्विक जिम्मेदारी और आध्यात्मिकता—को वर्तमान विश्व परिस्थिति में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए विस्तार से व्याख्यायित किया।

कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना से हुई, जिसके बाद एनएसएस इकाई के कार्यक्रम अधिकारी ने मुख्य अतिथि तथा वक्ता का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। मंच संचालन स्वयंसेवी तनु वर्मा ने सहज व सुगठित रूप से किया। स्वयंसेवी साहिल ने सम्मानपूर्वक अभिनंदन प्रस्तुत किया जबकि योग राज ने भावपूर्ण आभार ज्ञापन किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राजेश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गेशे कैलाश चंद्र बौद्ध का व्याख्यान आज के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक और चिंतन को प्रेरित करने वाला है। उन्होंने परमपावन दलाई लामा जी को इस सदी का सबसे शांत, करुणामय और मानवता-समर्पित व्यक्तित्व बताते हुए उनके विचारों को युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत बताया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्रों और प्रतिभागियों ने सवाल-जवाब के माध्यम से वक्ता से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया, जिससे यह सत्र और भी अधिक जीवंत और सारगर्भित बन गया। अंत में सामूहिक मंगल-मैत्री गायन के बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।
















