संपादकीय।
भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। अवलोकन उपग्रह ईओएस-एन1 के साथ पीएसएलवी-सी62 का प्रक्षेपण न केवल तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक दृष्टि, आत्मनिर्भरता और वैश्विक जिम्मेदारी का सशक्त प्रमाण भी है। श्रीहरिकोटा से होने वाला यह मिशन पृथ्वी अवलोकन की भारत की क्षमताओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा और कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, शहरी नियोजन तथा जलवायु अध्ययन जैसे क्षेत्रों में निर्णायक योगदान देगा।
पीएसएलवी—जिसे विश्वसनीयता का पर्याय कहा जाता है—की 64वीं उड़ान, इसरो की निरंतरता, अनुशासन और उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का प्रतीक है। ‘एकीकृत प्रक्षेपण’ और ‘राइड-शेयर’ मॉडल के तहत 14 सह-यात्री उपग्रहों का साथ उड़ान भरना, भारत को किफायती और भरोसेमंद अंतरिक्ष सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करता है। न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से वाणिज्यिक भागीदारी, भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही है।
यह मिशन केवल तकनीक नहीं, दृष्टि का भी उत्सव है—जहाँ स्वदेशी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग साथ-साथ चलते हैं। उपग्रह निर्माण में थाईलैंड और ब्रिटेन के संयुक्त प्रयास, भारत की सहयोगी नेतृत्व क्षमता को रेखांकित करते हैं। वहीं, कठोर उलटी गिनती, पूर्व-जांच और सटीक समयबद्धता, इसरो की पेशेवर परिपक्वता का परिचय देती है।
आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और आपदाओं की चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत का पृथ्वी अवलोकन मिशन मानवता के लिए समाधान-केंद्रित विज्ञान का संदेश देता है। यह प्रक्षेपण युवा भारत के लिए प्रेरणा है—कि सीमित संसाधनों में भी असीम सपने साकार किए जा सकते हैं।
अंतरिक्ष में भारत की यह उड़ान, धरती पर विश्वास जगाती है—कि विज्ञान, संकल्प और सेवा के साथ भारत भविष्य का नेतृत्व करने को तैयार है।





























