फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में एक डॉक्टर द्वारा मरीज के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर की सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है।
आरोपी डॉक्टर की पहचान
आईजीएमसी में मरीज के साथ कथित मारपीट करने वाले डॉक्टर की पहचान डॉ. राघव निरुला के रूप में हुई है। वह जिला सिरमौर के पांवटा साहिब के निवासी बताए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डॉक्टर के खिलाफ पूर्व में भी शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब की है।
एंडोस्कोपी के बाद बढ़ा विवाद
मरीज के परिजनों के मुताबिक, कुपुई निवासी अर्जुन पंवार इलाज के लिए आईजीएमसी पहुंचे थे, जहां उनकी एंडोस्कोपी कराई गई। प्रक्रिया सुबह करीब 11 बजे पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें कुछ समय आराम करने की सलाह दी थी। मरीज जब दूसरे वार्ड की ओर बढ़े तो चेस्ट वार्ड में एक खाली बेड देखकर वहां लेट गए। इसी दौरान वहां पहुंचे डॉक्टर से बहस हो गई, जो कथित तौर पर अभद्र भाषा और फिर मारपीट में बदल गई।
मारपीट का आरोप, अस्पताल में तनाव
मरीज का आरोप है कि जब उन्होंने डॉक्टर से सम्मानजनक व्यवहार की बात कही तो डॉक्टर ने आपा खो दिया और उनके साथ मारपीट की। घटना के बाद परिजन मौके पर पहुंचे और विरोध जताया, जिससे अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया। वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी डॉक्टर को ड्यूटी से हटा दिया। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है।
परिजनों का प्रदर्शन, पुलिस भी पहुंची
घटना से आक्रोशित मरीज के परिजनों ने अस्पताल में प्रदर्शन किया और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। स्थिति को संभालने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राहुल राव मौके पर पहुंचे और परिजनों से बातचीत कर मामला शांत कराया। पुलिस ने भी अस्पताल पहुंचकर औपचारिक शिकायत दर्ज करने और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य मंत्री का सख्त रुख
स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनी राम शांडिल ने स्पष्ट कहा है कि मरीजों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड करने या सेवा से बर्खास्त करने तक का निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही प्रदेश के सभी अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के व्यवहार को लेकर जल्द ही सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।
आईजीएमसी में मरीज से मारपीट का आरोप: वीडियो वायरल होते ही डॉक्टर ड्यूटी से हटाया गया, जांच के आदेश














