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व्यवस्था परिवर्तन’ की दिशा में बड़ा कदम: HPSEBL में डिजिटल सुधारों से सालाना 5.61 करोड़ की बचत, उपभोक्ताओं को मिलेगी आसान और पारदर्शी सेवाएं — सीएम सुक्खू


फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में मौजूदा सरकार का लक्ष्य केवल “व्यवस्था चलाना” नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलना है। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) में किए गए हालिया डिजिटल और प्रशासनिक सुधार इसी “व्यवस्था परिवर्तन” की ठोस मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देकर सरकार न केवल उपभोक्ता सेवाओं को बेहतर बना रही है, बल्कि वित्तीय अनुशासन की दिशा में भी मजबूत कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने समय से चले आ रहे महंगे आउटसोर्सिंग मॉडल को समाप्त कर प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है। इसके परिणामस्वरूप बिजली बिलिंग और ईआरपी (ERP) सिस्टम के सपोर्ट पर होने वाला वार्षिक खर्च लगभग 45 प्रतिशत तक कम हो गया है। पहले जहां इस मद में सालाना 12.29 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे, वहीं अब यह लागत घटकर 6.68 करोड़ रुपये रह गई है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से राज्य को हर साल लगभग 5.61 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी, जो तीन वर्षों में करीब 16.83 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह धन जनता का है और अब इसे बेकार व अप्रभावी पुराने अनुबंधों में बहाने की बजाय प्रदेश के लोगों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा।
29 लाख उपभोक्ताओं को होगा सीधा लाभ
मुख्यमंत्री ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर जोर देते हुए कहा कि HPSEBL का डिजिटलीकरण प्रदेश के करीब 29 लाख घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने कहा, “सरकार का संकल्प है कि शासन को लोगों के द्वार तक पहुंचाया जाए। अब नए बिजली कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन, स्मार्ट बिलिंग, प्रीपेड सेवाएं जैसी सुविधाओं से आम आदमी को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।”
उन्होंने बताया कि एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण के माध्यम से अब ऑनलाइन बिल भुगतान, शिकायत दर्ज करना और त्वरित निवारण संभव हो पाया है, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि अनावश्यक देरी भी कम हुई है।
बोर्ड की वित्तीय सेहत सुधारने पर फोकस
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार HPSEBL की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए AT&C लॉस को कम करने, समय पर बिलिंग और वसूली सुनिश्चित करने, स्मार्ट और प्रीपेड मीटरिंग के जरिए राजस्व रिसाव रोकने तथा परिचालन खर्चों के युक्तिकरण पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके साथ-साथ बेहतर पावर परचेज प्लानिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली अपनाकर बोर्ड की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्रदेश को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिलती रहे।
2027 तक आत्मनिर्भर और आधुनिक हिमाचल की नींव
मुख्यमंत्री ने कहा, “व्यवस्था परिवर्तन का मतलब है संस्थानों को आत्मनिर्भर और जवाबदेह बनाना। बिजनेस इंटेलिजेंस (BI) और एआई आधारित प्लेटफॉर्म जैसी आधुनिक तकनीकों को राज्य के कामकाज में शामिल कर हम 2027 तक एक आधुनिक, समृद्ध और आत्मनिर्भर हिमाचल प्रदेश की मजबूत नींव रख रहे हैं।”
उन्होंने दोहराया कि मौजूदा सरकार का संकल्प स्पष्ट है— सिस्टम को सिर्फ चलाना नहीं, बल्कि उसे बेहतर, पारदर्शी और जनहितैषी बनाना।

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