फ्रंट पेज न्यूज़
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार का दिन राज्य की भूमि नीतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने सदन में हिमाचल प्रदेश भू-अभिधृति एवं भूमि सुधार (संशोधन) विधेयक 2025 प्रस्तुत किया। यह संशोधन 1972 के मूल अधिनियम की धारा 118 में बदलाव के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि बदलते समय और आधुनिक आर्थिक ज़रूरतों के अनुरूप राज्य की भूमि नीतियों में आवश्यक लचीलापन लाया जा सके।
व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 10 वर्ष की लीज अब धारा 118 से बाहर
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अब ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भवन या भवन के हिस्से को 10 वर्ष तक लीज पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए देने पर धारा 118 की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
इसका सीधा लाभ छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स, दुकानदारों और ग्रामीण पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नयी जान आएगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सरकारी अधिग्रहित भूमि पर धारा 118 लागू नहीं होगी
धारा 118(2)(ई) में संशोधन करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य/केंद्र सरकार, सरकारी कंपनियों या वैधानिक निकायों द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत अधिग्रहित भूमि पर धारा 118 की पाबंदियां लागू नहीं होंगी।
पहले यह प्रावधान अस्पष्ट था, जिसे अब सरल और स्पष्ट रूप दिया जा रहा है।
कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियों को भूमि खरीदने की अनुमति
विधेयक में एक अन्य बड़ा बदलाव यह है कि अब पूर्णत: कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियां भूमि खरीद सकेंगी।
हालांकि इसकी शर्तें सख्त हैं—
समिति में केवल कृषक सदस्य ही हों
हर वर्ष रजिस्ट्रार को घोषणा देनी होगी
किसी गैर-कृषक की सदस्यता बनने पर समिति की खरीदी गई भूमि सरकार में निशुल्क निहित हो जाएगी
सरकार का तर्क है कि राज्य में लगभग 20 लाख लोग सहकारी आंदोलन से जुड़े हैं, इसलिए यह संशोधन कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को गति देगा।
हिमुडा, TCP और रेरा पंजीकृत प्रोजेक्ट के खरीदारों को बड़ी राहत
अब तक हिमुडा या TCP से घर/दुकान खरीदने वाला पहला खरीदार धारा 118 से मुक्त रहता था।
यह छूट आगे आने वाले सभी खरीदारों को भी मिलेगी
रेरा-पंजीकृत परियोजनाओं से 500 वर्गमीटर तक का बना फ्लैट/भवन खरीदने वाले गैर-कृषक खरीदारों को भी अनुमति नहीं लेनी होगी
स्टांप ड्यूटी वही होगी, जो सामान्य रूप से धारा 118 अनुमति प्राप्त गैर-कृषकों पर लागू होती है।
भू-उपयोग के लिए 3 वर्ष की बाध्यता, अधिकतम 5 वर्ष अतिरिक्त मोहलत
धारा 118 की अनुमति लेकर भूमि खरीदने वालों को अब भी 3 वर्ष में भूमि का उपयोग करना होगा।
लेकिन अब सरकार—
2 वर्ष की अतिरिक्त अवधि दे सकेगी
कुल 5 वर्ष तक एक-एक वर्ष की एक्सटेंशन संभव होगी
देरी पर पेनल्टी लगेगी
उपयोग न होने पर भूमि सरकार में मुफ्त में निहित हो जाएगी
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया—“लोगों की वास्तविक समस्याएँ ध्यान में रखकर संशोधन लाए हैं”
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि धारा 118 की मूल भावना को सुरक्षित रखते हुए सिर्फ व्यावहारिक लचीलापन जोड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में लोग 5 वर्ष में 70% निर्माण पूरा कर लेते हैं, लेकिन एक्सटेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं था।
अब सरकार जुर्माने के साथ 1–2 वर्ष की अतिरिक्त मोहलत दे सकेगी।














