फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर निर्भर एक लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। निदेशालय अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से सक्षम का सशक्तिकरण ने ई-केवाईसी (eKYC) प्रक्रिया पूरी न करने वाले लाभार्थियों की पेंशन को अस्थायी रूप से रोकने के निर्देश जारी किए हैं।
निदेशालय की ओर से राज्यभर के सभी जिला कल्याण अधिकारियों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि जिन 1,17,660 लाभार्थियों ने अब तक eKYC नहीं करवाई है, उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन रोकी जाए। इसमें गैर-जनजातीय क्षेत्रों के लाभार्थियों की तीन महीने की और जनजातीय क्षेत्रों में अग्रिम तौर पर दी जाने वाली पेंशन शामिल है।
प्रदेश में इस समय कुल 8,24,888 सक्रिय पेंशन लाभार्थी हैं, जिनमें से 7,07,228 लाभार्थियों ने ही अपनी eKYC प्रक्रिया पूरी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थियों की eKYC पूर्ण हो चुकी है, उनके खातों में 27 दिसंबर तक पेंशन राशि जमा कर दी जाएगी।
15 दिसंबर तक था अंतिम अवसर
सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों को eKYC कराने के लिए विभाग द्वारा कई बार अवसर दिए गए। इसके लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाए गए, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लाभार्थी तय समय सीमा तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। विभाग ने 15 दिसंबर को eKYC कराने की अंतिम तिथि तय की थी, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया।
पेंशन दोबारा कैसे मिलेगी?
इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत सिंह नेगी ने कहा कि जिन लाभार्थियों की पेंशन अस्थायी रूप से रोकी गई है, वे जैसे ही अपनी eKYC प्रक्रिया पूरी करेंगे, उन्हें फिर से पहले की तरह सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। यह रोक स्थायी नहीं है और केवल प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहेगी।
372.24 करोड़ रुपये होंगे खर्च
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत राज्य सरकार द्वारा अनुमानित 372.24 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अंतर्गत गैर-जनजातीय क्षेत्रों में अक्टूबर से दिसंबर (तीसरी तिमाही) और जनजातीय क्षेत्रों में अक्टूबर से मार्च तक की पेंशन राशि जारी की जाएगी। हालांकि, इस महीने पेंशन केवल उन्हीं लाभार्थियों को मिलेगी, जिन्होंने समय रहते अपनी eKYC पूरी कर ली है।
विभाग का कहना है कि यह कदम पेंशन प्रणाली में पारदर्शिता, फर्जीवाड़े पर रोक और वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
















