फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
हिमाचल प्रदेश में अब घर, फ्लैट और प्लॉट खरीदना आम लोगों के लिए और महंगा होने जा रहा है। सुक्खू सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी परियोजनाओं पर बड़ा फैसला लेते हुए रजिस्ट्रेशन फीस में तीन से चार गुना तक की बढ़ोतरी कर दी है। इस संबंध में आवास विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश भू-संपदा (विनियमन और विकास) संशोधन नियम, 2025 को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत अब रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण के लिए बिल्डरों और डेवलपर्स को पहले की तुलना में कहीं अधिक शुल्क चुकाना होगा। इस फैसले का सीधा असर आने वाले समय में फ्लैट और प्लॉट की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
अधिसूचना के अनुसार आवासीय उपयोग के लिए प्लॉट डेवलपमेंट पर पहले जमाबंदी कुल परियोजना भूमि का 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर शुल्क लिया जाता था, जिसे अब ग्रामीण क्षेत्रों में 30 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। इसी तरह कमर्शियल प्लॉटिंग के लिए यह शुल्क 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 60 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 80 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। वहीं संयुक्त आवासीय और वाणिज्यिक उपयोग के लिए प्लॉटेड विकास पर पहले 15 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर थी, जिसे अब ग्रामीण क्षेत्रों में 45 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 60 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है।
इसके अलावा सरकार ने स्वीकृत योजना के तहत होने वाले प्लॉटेड विकास की फीस में भी भारी बढ़ोतरी की है। अब आवासीय उपयोग के लिए यह शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 30 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है, जबकि वाणिज्यिक उपयोग के लिए इसे 20 रुपये से बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 60 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 80 रुपये प्रति वर्ग मीटर किया गया है। संयुक्त श्रेणी में यह शुल्क 15 रुपये से बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 45 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 60 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का बोझ अंततः आम लोगों पर ही पड़ेगा, क्योंकि बिल्डर और डेवलपर्स बढ़ी हुई लागत को मकानों और प्लॉटों की कीमतों में जोड़ सकते हैं, जिससे हिमाचल में अपना घर खरीदने का सपना और महंगा हो जाएगा।




























