मौसमक्रिकेटईरान इस्राइल युद्धमेले और त्यौहारस्पोर्ट्सबॉलीवुडजॉब - एजुकेशनबिजनेसलाइफस्टाइलदेश-विदेशराशिफलआध्यात्मिक

तारीख पर तारीख… हिमाचल पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने दी अगली सुनवाई की तारीख, सुक्खू सरकार को मिली अस्थायी राहत

फ्रंटपेज न्यूज़ शिमला।
हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर आज Himachal Pradesh High Court में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई अब उसी खंडपीठ के समक्ष होगी, जिसने पूर्व में इसी विषय से जुड़े प्रकरण पर फैसला सुनाया था। इसके साथ ही मामले को 6 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।
पहले दिए गए आदेशों का हवाला
यह सुनवाई याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर हुई, जिसकी सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने देवेंद्र नेगी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले का हवाला दिया, जिसमें पंचायत चुनावों और चुनाव नियमों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।
अदालत को बताया गया कि उस मामले में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इलेक्शन रूल 9(2) को निरस्त करते हुए चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के आदेश दिए थे।
पूर्व फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उस समय किशन सिंह तोमर बनाम गुजरात राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पूर्ण रूप से ध्यान में नहीं लाया गया था। इसी कारण न्यायिक अनुशासन के तहत वर्तमान याचिका की सुनवाई उसी खंडपीठ के समक्ष होना उचित होगा।
अदालत ने साफ किया कि वह पूर्व में दिए गए फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, बल्कि प्रक्रिया के अनुसार मामले को संबंधित खंडपीठ के पास भेजा जा रहा है।
6 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
आदेश पारित करते हुए कोर्ट ने कहा कि 6 जनवरी को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगी। इस फैसले को फिलहाल सरकार के लिए एक तरह की राहत के रूप में देखा जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं के आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि Thakur Sukhvinder Singh Sukhu सरकार जानबूझकर पंचायत चुनावों में देरी कर रही है। उनका कहना है कि 31 जनवरी को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन अब तक चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
कानून के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव की तैयारी और प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए, लेकिन इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। इस मामले में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को पक्षकार बनाया गया है।
अब सबकी नजरें 6 जनवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से यह तय होगा कि हिमाचल में पंचायत चुनावों की राह कब और कैसे साफ होती है।

You cannot copy content of this page