फ्रंट पेज न्यूज़ नेटवर्क
शिमला: हिमाचल प्रदेश पर भूकंप का खतरा अब पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गया है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने नए राष्ट्रीय भूकंपीय मानचित्र में पूरे हिमालयी क्षेत्र को Zone-6, यानी भारत के सबसे खतरनाक भूकंप क्षेत्र, में शामिल कर दिया है। यह वही श्रेणी है जिसमें बहुत बड़े और विनाशकारी भूकंप आने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस जोन में बड़ा भूकंप आता है, तो उसकी तीव्रता 1905 के कांगड़ा भूकंप से भी अधिक विनाशकारी हो सकती है। खतरे की घंटी बजते ही हिमाचल सरकार एक्शन मोड में आ गई है और अब उसने आपदा प्रबंधन के दो बड़े मोर्चों पर युद्ध-स्तरीय तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पूरे प्रदेश में 100 आधुनिक भूकंप अलार्म यंत्र लगाने की योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।

Zone-6 का मतलब है कि किसी भी क्षण बहुत बड़े भूकंप की संभावना रहती है, जहाँ धरती केवल हिलती नहीं, बल्कि भूस्खलन, जमीन फटना और बड़े पैमाने पर संरचनाओं का ढह जाना आम परिणाम हो सकते हैं। इस जोन में कमजोर या पुरानी इमारतें पलभर में ताश के पत्तों की तरह गिर सकती हैं। ऐसे वैज्ञानिक आकलनों ने सरकार को तुरंत तैयारी शुरू करने के लिए मजबूर किया है। प्रदेश में पहले से ही पिछले तीन वर्षों में 600 से अधिक लोग विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवा चुके हैं, जिससे स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
भूकंप चेतावनी प्रणाली लोगों की जान बचाने में बेहद प्रभावी मानी जाती है। जब भूकंप आता है, तो सबसे पहले तेज लेकिन कम नुकसानदायक तरंगें निकलती हैं और कुछ ही सेकंड बाद विनाशकारी तरंगें आती हैं। जमीन में लगे सेंसर पहले ही संकेत पकड़ लेते हैं और तुरंत अलर्ट प्रोसेसिंग सेंटर तक भेजते हैं। इसके बाद कुछ सेकंड पहले—मोबाइल, टीवी, रेडियो या सायरन के जरिए अलार्म बजा दिया जाता है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचने का समय मिल जाता है। इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हिमाचल सरकार राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) की मदद से राज्य भर में 100 प्रारंभिक चेतावनी अलार्म सिस्टम स्थापित कर रही है। पहले चरण में 10 उपकरण तुरंत प्रभाव से अलग-अलग जिलों में लगाए जा रहे हैं।
इधर, सरकार ने साफ कर दिया है कि जब खतरा नया है तो भवन निर्माण नियम भी नए होंगे। नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि राज्य के सभी स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी भवनों और महत्वपूर्ण संरचनाओं की अब रिमैपिंग की जाएगी। जो भी इमारतें ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में आएंगी, उनका Structural Safety Audit होगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें तोड़ा या दोबारा मजबूत किया जाएगा। निजी इमारतों के लिए भी नए और सख्त भवन मानक लागू करने की तैयारी है ताकि भविष्य में बड़ी त्रासदी से बचा जा सके।
सरकार का कहना है कि Zone-6 में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। मंत्री धर्माणी के अनुसार, राज्य का लक्ष्य किसी आपदा का इंतजार करने के बजाय पहले ही खुद को मजबूत करना है—नीचे से लेकर ऊपर तक। अब नजर इस बात पर है कि सरकार के यह एक्शन प्लान कितनी तेजी से ज़मीन पर उतरते हैं, क्योंकि नए वैज्ञानिक मानकों ने साफ कर दिया है कि हिमाचल अब देश के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र में खड़ा है और सुरक्षा को लेकर प्रत्येक कदम बेहद महत्वपूर्ण है















