हिमाचल प्रदेश को वीरभूमि कहा जाता है, और आज इस वीरभूमि ने अपना एक और बहादुर सपूत खो दिया। कांगड़ा जिले के बैजनाथ उपमंडल के द्रुग-डंढेराध गांव के 40 वर्षीय हवलदार संजीव कुमार के निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया।

भारतीय सेना की 13 डोगरा यूनिट में तैनात संजीव कुमार पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और कर्नाटक के बैंगलुरु स्थित आर्मी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पीलिया (जॉन्डिस) की गंभीर स्थिति के चलते रविवार को उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन की सूचना मिलते ही परिवार पर मानो पहाड़ टूट पड़ा और गांव का माहौल मातम में बदल गया।
मंगलवार दोपहर जब जवान की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव पहुंची तो पूरे क्षेत्र में सन्नाटा फैल गया। पत्नी सरूचि की हृदयविदारक चीखें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। जवान के दोनों मासूम बेटे—8 साल का आरव और 5 साल का साहिल—इस दर्द को समझने की कोशिश करते नजर आए, जबकि आसपास मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। संजीव कुमार की मां, पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों का टूटकर बिखर जाना हर किसी के दिल को झकझोर गया।

कुछ देर तक पार्थिव देह घर में रखी गई, जहां परिजनों, ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने नम आंखों से अंतिम दर्शन किए। इसके बाद स्थानीय श्मशानघाट में हवलदार संजीव कुमार का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने सलामी देते हुए अपने साथी को अंतिम विदाई दी। सबसे पीड़ादायक क्षण तब आया जब संजीव कुमार के मात्र 8 वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों के दिल को कंपा दिया और पूरा वातावरण गम और गर्व के मिश्रण से भर गया।

अंतिम संस्कार में भारी संख्या में ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी, सेना के जवान और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल भी अंतिम संस्कार में उपस्थित हुए और परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हवलदार संजीव कुमार जैसे वीर सैनिक देश की शान होते हैं और परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस वीर सैनिक का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
हवलदार संजीव कुमार की असमय मृत्यु न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और राष्ट्र के लिए एक गहरी क्षति है। देश की रक्षा के लिए समर्पित उनका साहस, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी। वीरभूमि हिमाचल ऐसे सपूतों पर गर्व करती है, जो अपने कर्तव्य के लिए जीवन भी न्यौछावर कर देते हैं और अमर हो जाते हैं।















