फ्रंट पेज न्यूज़ सिरमौर।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के हरिपुरधार में शुक्रवार को हुआ भीषण बस हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कुपवी उपमंडल के लिए ऐसा कभी न भरने वाला जख्म बन चुका है, जिसने पूरे इलाके को शोक और सन्नाटे में डुबो दिया है। माघी पर्व से पहले जहां घर-घर में त्योहार की तैयारियां चल रही थीं, वहीं अब हर गली, हर आंगन और हर घर में सिर्फ मातम पसरा हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में अकेले कुपवी उपमंडल के 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों घायल अभी भी नाहन मेडिकल कॉलेज, राजगढ़, सोलन, आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। शिमला से वाया सोलन कुपवी जा रही ओवरलोड निजी बस शुक्रवार दोपहर करीब 2:40 बजे हरिपुरधार के पास सड़क पर जमी पाला (बर्फ) के कारण स्किड होकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें चालक समेत 14 लोगों की मौके पर ही या इलाज के दौरान मौत हो गई और 50 से अधिक यात्री घायल हो गए। हादसे के बाद जैसे ही मृतकों के शव उनके गांवों में पहुंचे, पूरा इलाका रोने-बिलखने की आवाजों से गूंज उठा। कुपवी उपमंडल के बोहरा गांव में शनिवार को वह मंजर देखने को मिला, जिसने पत्थर दिल इंसान की भी रूह हिला दी, जब एक ही गांव में एक साथ तीन चिताएं जलीं—35 वर्षीय रमेश, उनकी पत्नी साक्षी और गांव के दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया और दंपति के पीछे उनका दो साल का मासूम बेटा इस दुनिया में पूरी तरह बेसहारा रह गया, जो अंतिम संस्कार के दौरान बार-बार अपने मां-बाप को तलाशता रहा और यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं; इसी गांव की रियांशी और कियान की मौत ने भी पूरे इलाके की खुशियां छीन लीं। इस हादसे ने यह भी साबित कर दिया कि मौत उम्र नहीं देखती—चंजाह गांव की 6 साल की हिमांशी और 21 साल की प्रोमिला, धौलत गांव की 50 वर्षीय हिमा और 60 वर्षीय सूरत सिंह, और दोची गांव की 28 वर्षीय सुमन, जो शिमला के लोअर बाजार में कपड़ों की दुकान में नौकरी करती थीं और माघी के लिए घर लौट रही थीं, सब इस हादसे का शिकार हो गए, जिनके घरों में अब सिर्फ उनकी तस्वीरें और यादें बची हैं। जुडू-शिलाल गांव के बिलम सिंह की मौत ने तो एक पूरे परिवार की कमर ही तोड़ दी, क्योंकि वह शिमला में होटल लीज पर लेकर काम करते थे और घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे; वह अपनी कॉलेज में पढ़ने वाली बेटी निकिता के साथ घर लौट रहे थे, जो इस हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर सोलन अस्पताल में भर्ती है, और अब घर में सिर्फ पत्नी और दो बेटियां रह गई हैं, जिनके सामने भविष्य की चिंता एक बड़े पहाड़ की तरह खड़ी हो गई है। सरकार ने हादसे की जांच के आदेश जरूर दे दिए हैं, लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए, जिन आंगनों से बच्चों की किलकारियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं और जिन परिवारों की खुशियां एक पल में उजड़ गईं, उनके लिए यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर न भूल पाने वाला दर्द बन चुका है—माघी से पहले कुपवी के लिए यह त्रासदी ऐसी याद बन गई है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी आंसुओं के साथ याद करेंगी।
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हरिपुर बस हादसा: माघी से पहले उजड़ गया कुपवी, एक झटके में बुझ गए 10 घरों के चिराग













