स्क्रीन के उस पार
तुम हंस रहे हो…
और इस पार
तुम्हारी खामोशी चीख रही है।
तुमने फिर एक रील डाली है—
संगीत तेज़,
चेहरा चमकता हुआ,
और कैप्शन में लिखा—
“Life is beautiful ❤️”

पर सच तो ये है ना…
कल रात तुमने
नींद से ज्यादा
अपनी सोचों से लड़ाई लड़ी थी।
ये जो लाइक्स हैं—
ये मरहम नहीं होते,
ये बस कुछ पल के लिए
दर्द को “म्यूट” कर देते हैं।
तुम हर दिन
खुद को समझाते हो—
“सब ठीक है”,
जबकि अंदर
सब कुछ टूट रहा होता है।
रिश्ते भी अब
नेटवर्क जैसे हो गए हैं—
सिग्नल हो तो बात,
वरना “No Connection”।

कभी जो आँखों से समझते थे,
आज “Last Seen” देखते हैं,
और जो दिल से जुड़े थे,
अब बस “Viewers” रह गए हैं।
पर सुनो…
इस दिखावे के शहर में भी
एक सच्चाई बची है—
तुम थके हो,
पर खत्म नहीं।
तुम टूटे हो,
पर बिखरे नहीं।
और एक दिन
जब तुम स्क्रीन से बाहर आओगे,
तो पाओगे—
ज़िंदगी अब भी वहीं खड़ी है,
तुम्हारा इंतज़ार करती हुई…
बिना किसी फ़िल्टर के।
















