भूस्खलन, जाम और बंद रूटों से त्रस्त जनता; चेतावनी— अब सड़कों पर होगा संघर्ष।
फ्रंट पेज न्यूज़,बंजार (कुल्लू):

बंजार विधानसभा क्षेत्र में बदहाल सड़कों और ठप पड़ी बस सेवाओं को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के बजौरा मंडल की विशेष बैठक के बाद क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र शौरी ने प्रदेश सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “सरकार की लापरवाही ने पूरे क्षेत्र को संकट में धकेल दिया है।”
बैठक में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने जमीनी हकीकत सामने रखते हुए बताया कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। लोग घंटों पैदल चलने को मजबूर हैं, मरीजों और बुजुर्गों को अस्पताल तक पहुंचाना तक चुनौती बन गया है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि रोजमर्रा के कामकाज पर भी गंभीर असर पड़ा है।

विधायक शौरी ने कहा कि बंजार की सड़कें अब “सड़कें कम और खतरे का मैदान ज्यादा” बन चुकी हैं। जगह-जगह गड्ढे, धंसते किनारे और टूटे मार्ग प्रशासन की निष्क्रियता की पोल खोल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल कागजों में विकास दिखा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग-305 के बैंती माता मंदिर, सिधवा, दाडूधार और छेत-पानी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों का जिक्र करते हुए शौरी ने कहा कि यहां बार-बार हो रहे भूस्खलन के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। “हर बार अस्थायी मरम्मत कर खानापूर्ति कर दी जाती है, लेकिन जोखिम जस का तस बना रहता है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कई खतरनाक ब्लैकस्पॉट बन चुके हैं, जहां हर समय दुर्घटना का खतरा मंडराता रहता है। बावजूद इसके न तो चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले ही सड़कों पर लग रहे लंबे जाम को लेकर भी विधायक ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि “जब अभी यह हाल है, तो सीजन के चरम पर हालात कितने भयावह होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।”

शौरी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि न तो सड़कों की स्थायी मरम्मत के लिए कोई दीर्घकालिक नीति है और न ही यातायात व्यवस्था को सुधारने की कोई ठोस योजना। “सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है और जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है,” उन्होंने आरोप लगाया।
विधायक ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो बंजार की जनता सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होगी। “यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और सुरक्षा का सवाल है,” उन्होंने कहा।
बंजार में बुनियादी ढांचे की बिगड़ती स्थिति अब गंभीर जनसंकट का रूप लेती जा रही है। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आक्रोश किसी बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार पर होगी।












