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बंजार नगर पंचायत में पिछले टैक्स विवाद पर धूल भी नहीं बैठी, जीआईएस सर्वे के बाद टैक्सों में भारी उछाल

फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।

बंजार। नगर पंचायत बंजार द्वारा गृह कर उपनियमों के तहत अधिकांश संपत्तियों का जीआईएस सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही पेट रजिस्ट्रेशन, ट्रेडिंग लाइसेंस, लॉज, विज्ञापन एवं अन्य बायलॉज को नगर पालिका अधिनियम 1984 के अंतर्गत अंतिम रूप दे दिया गया है। नगर पंचायत को अस्तित्व में आए तीन दशक से अधिक हो चुका है, लेकिन आय बढ़ाने के ठोस उपाय न होने के कारण अब नगरवासियों पर सीधा कर बोझ डालने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत बंजार मूलभूत सुविधाओं के विकास में बुरी तरह विफल रही है। नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था, सड़क किनारे बहते गंदे पानी, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक शौचालयों की कमी जैसे मुद्दों पर वर्षों से कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। ऐसे में सुविधाएँ उपलब्ध कराए बिना टैक्स में भारी बढ़ोतरी को लोग खुला अन्याय मान रहे हैं। कई परिवारों ने बताया कि नए सर्वे के बाद उनके टैक्स दोगुने से चार गुना तक बढ़ा दिए गए हैं।

जनता द्वारा दिए गए आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। प्रेमलाल का टैक्स 2240 से बढ़कर 8875 कर दिया गया है, किरन ठाकुर का 4872 से 13819, श्यामलाल का 1500 से 7980, किशन ठाकुर का 657 से 3003, विद्या देवी का 847 से 19315, अजय मेहता का 5184 से 9659 और दिलीप का कर 2402 से बढ़कर 7792 कर दिया गया है। लोग यह भी कह रहे हैं कि पहले हुई टैक्स बढ़ोतरी का विरोध अभी शांत नहीं हुआ था, परंतु उसी बीच दोबारा नए सिरे से टैक्स वृद्धि को लागू करना किसी भी आधार पर उचित नहीं है।

नरेंद्र शौरी

वार्ड नंबर 1 के निवासी नरेंद्र शौरी ने कहा कि उनकी एक संपत्ति का कर 7425 रुपये से बढ़ाकर 20777 कर दिया गया है, जबकि दूसरी संपत्ति का कर 2809 रुपये से बढ़ाकर 31530 कर दिया गया है। इसे कहां तक उचित माना जा सकता है?

कृष्णा शर्मा

वार्ड नंबर 2 के कृष्ण शर्मा ने बताया कि हमारे रिहायशी मकान का जो पहले कर 983 रुपये था अभी उसी का विरोध चला था यकायक नए सर्वे इसे 4298 पहुंचा दिया। जो किसी भी आधार पर उचित नहीं लगता।

अजय मेहता

वार्ड नंबर 3 के अजय मेहता ने बताया कि सुविधाओं का कोई विकास नहीं हुआ, कौन सा विकास और सुविधाएं समझ से परे है !लेकिन कर 5184 से सीधे 9659 कर दिया गया।  5154 पहले ही अधिक कर लगाया गया है।

हेमराज शर्मा

वार्ड नंबर 4 के हेमराज शर्मा ने आरोप लगाया कि बंजार कोई बड़ा व्यापारिक केंद्र नहीं है, फिर भी व्यापारियों पर ट्रेडिंग लाइसेंस और अन्य कर थोपे जा रहे हैं। यह कोई बड़ा व्यापारिक हब नहीं है।

संजय कपूर

वार्ड नंबर 6 के संजय कपूर ने कहा कि वर्षों से न सफाई सुधरी, न नालियों का रखरखाव, और न ही शौचालयों की स्थिति में सुधार हुआ, उल्टा टैक्स बढ़ाकर जनता की जेब खाली की जा रही है। इसे बेहतर तो पंचायत ही था यह क्षेत्र !  जियोग्राफी का ध्यान रखा जाना चाहिए।

स्थानीयों का कहना है कि नगर पंचायत के पास अपनी जमीन नाम मात्र है, जिसके कारण स्वयं की आय के स्रोत नहीं बन पाए हैं। ऐसे में सबसे आसान तरीका नागरिकों पर अतिरिक्त कर बोझ डालना ही अपनाया जा रहा है। हालांकि नागरिकों का तर्क है कि गरीब और मध्यम वर्ग पर कर भार डालने से पहले नगर पंचायत को विकल्पी आय स्रोत विकसित करने चाहिए। वहीं बंजार में सार्वजनिक शौचालयों की कमी, नालियों की अव्यवस्था और कचरा प्रबंधन की खराब स्थिति आज भी जस की तस है, जिससे आम लोग परेशान हैं।

इस मामले पर नगर पंचायत के सचिव हर्षित शर्मा ने बताया कि संपत्ति कर सर्वे और बायलॉज अभी आपत्तियों और सुझावों के लिए खुले हैं। जनता जो भी सुझाव देगी, उसके आधार पर संशोधन करने पर विचार किया जाएगा। हालांकि नगरवासियों का स्पष्ट कहना है कि सुविधाओं में सुधार के बिना टैक्स बढ़ाना असंतुलित और अनुचित निर्णय है। नागरिकों का मानना है कि नगर पंचायत को टैक्स वसूली से पहले पारदर्शिता लानी होगी, संसाधनों को बढ़ाना होगा और मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करना होगा, तभी कर वृद्धि को न्यायोचित माना जा सकेगा।

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