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बांग्लादेश मुद्दे पर भारत में सियासी संग्राम, हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर भाजपा–कांग्रेस आमने-सामने

फ्रंट पेज न्यूज़ नई दिल्ली।
बांग्लादेश में हालिया उथल-पुथल और वहां अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित हमलों ने भारत की राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है। यह मुद्दा अब केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के भीतर भाजपा और कांग्रेस के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है। दोनों दल एक-दूसरे पर इतिहास, नीतियों और मौजूदा हालात को लेकर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।


इस पूरे मामले पर Bharatiya Janata Party के राष्ट्रीय प्रवक्ता Gopal Agarwal ने दावा किया कि यदि वर्ष 1971 में बांग्लादेश का निर्माण न कर उसे भारत में विलय कर लिया गया होता, तो आज वहां हिंदुओं को इस तरह की हिंसा और उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने इस फैसले को उस समय की कांग्रेस सरकार की ऐतिहासिक भूल करार दिया।
भाजपा नेताओं के इस रुख को और बल तब मिला, जब केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi और सांसद Nishikant Dubey ने सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया कि बांग्लादेश का निर्माण ही आज की समस्याओं की जड़ है। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस की पुरानी नीतियों का खामियाजा आज वहां के हिंदू अल्पसंख्यकों को भुगतना पड़ रहा है।
गोपाल अग्रवाल ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आज कांग्रेस को बांग्लादेश के हिंदुओं की इतनी चिंता है, तो 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi ने किन परिस्थितियों में बांग्लादेश का गठन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राजनीतिक समझौतों में भारत के हितों से समझौता किया गया। अग्रवाल ने यह भी कहा कि आज अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देश भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर वहां की सरकार की आलोचना कर रहे हैं, लेकिन भारत में विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर भी राजनीति कर रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि वह विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है। इस बीच, हिंदू संगठनों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भारत सरकार लगातार बांग्लादेश सरकार के संपर्क में है, कूटनीतिक स्तर पर सख्त संदेश दिए जा रहे हैं और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।
दूसरी ओर, Indian National Congress ने भाजपा के आरोपों का कड़ा जवाब दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने कहा कि इंदिरा गांधी ने 1971 में पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांटकर न केवल बांग्लादेश को आज़ादी दिलाई, बल्कि एक लाख से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया। खड़गे ने सवाल उठाया कि जो सरकार पीओके वापस लेने के दावे करती है, वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं कर पा रही।
कांग्रेस सांसद Imran Masood ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आज नेतृत्व में गांधी नाम होता, तो शायद समस्या का समाधान आसान होता। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता Digvijaya Singh ने आरोप लगाया कि भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती असहिष्णुता का असर पड़ोसी देशों में भी दिखाई दे रहा है, जिसके कारण बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बढ़े हैं।
यह पूरा विवाद 18 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश में युवा नेता Sharif Usman Hadi की मौत के बाद भड़की हिंसा के बाद और तेज हो गया, जिसने वहां हालात को और अस्थिर कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा और अधिक गरमाएगा, क्योंकि विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे विषय मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचार का मुद्दा अब केवल मानवीय चिंता नहीं रहा, बल्कि भारत की आंतरिक राजनीति में एक बड़ा हथियार बन चुका है, जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश कर रही हैं।

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