फ्रंट पेज न्यूज़ डेस्क।
भारत के विमानन क्षेत्र में एक साथ कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिनका सीधा असर यात्रियों और एयरलाइनों दोनों पर पड़ने वाला है। सबसे बड़ा फैसला यह है कि सरकार ने घरेलू उड़ानों पर लागू अस्थायी किराया सीमा (Airfare Cap) को समाप्त करने का निर्णय लिया है, जो 23 मार्च 2026 से प्रभावी होगा।
यह नियम पिछले वर्ष लागू किया गया था, जब IndiGo को लगातार उड़ान रद्द होने और संचालन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अब इस सीमा के हटने के बाद, मांग बढ़ने पर हवाई किराए में तेज़ उछाल देखने को मिल सकता है। खासकर दिल्ली–मुंबई जैसे व्यस्त रूट्स पर यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यात्रियों को जल्द से जल्द टिकट बुक करना समझदारी होगी।
दूसरी ओर, Air India ने अपने केबिन क्रू के लिए एक सख्त फिटनेस नीति लागू करने का ऐलान किया है, जो 1 मई 2026 से प्रभावी होगी। इस नई नीति के तहत क्रू सदस्यों का BMI (Body Mass Index) 18 से 24.9 के बीच होना अनिवार्य होगा। जो कर्मचारी इस सीमा से बाहर पाए जाएंगे, उन्हें स्वास्थ्य जांच से गुजरना होगा। वहीं, अधिक वजन (Obese) की श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को वेतन कटौती या उड़ान से हटाए जाने जैसे कड़े कदमों का सामना करना पड़ सकता है।
इस नीति का उद्देश्य सुरक्षा और पेशेवर मानकों को बनाए रखना बताया जा रहा है, लेकिन इससे कर्मचारियों के बीच तनाव का माहौल भी देखा जा रहा है।
इसी बीच, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर गंभीर असर डाला है। खासकर ईरान से जुड़े हालात के कारण एयर इंडिया की उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। वर्तमान में एयरलाइन केवल 40–50 उड़ानों का संचालन कर पा रही है, जो सामान्य स्तर से काफी कम है। कई रूट्स को अस्थायी रूप से बंद या सीमित कर दिया गया है, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तेल आपूर्ति, हवाई मार्ग और यात्रियों के भरोसे पर इस संकट का असर साफ दिख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारतीय विमानन उद्योग को और गहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।















