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एंटी-चिट्टा अभियान तेज: मंडी की 24 अति-संवेदनशील पंचायतों में रणनीतिक बैठकें

फ्रंट पेज न्यूज़ मंडी।
मंडी जिला में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने ज़मीनी स्तर पर कमर कस ली है। नशा निवारण की दिशा में आज जिला की 24 अति-संवेदनशील ग्राम पंचायतों में विशेष बैठकों का आयोजन कर ठोस रणनीति तैयार की गई। इन बैठकों का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी तय करना भी रहा।

प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर पूरे हिमाचल प्रदेश में एंटी-चिट्टा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी और आपूर्ति पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ आम लोगों, विशेषकर युवाओं को जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत स्तर पर नशा निवारण समितियों का गठन कर उन्हें सक्रिय किया गया है।

जिला उपायुक्त अपूर्व देवगन ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार मंडी जिला की 24 अति-संवेदनशील पंचायतों में आज नशा निवारण समितियों की बैठकें आयोजित की गईं। इनमें गोपालपुर, सिराज, चौंतड़ा, सदर, बल्ह, सुंदरनगर, द्रंग और बालीचौकी विकास खंड की पंचायतें शामिल रहीं। बैठकों के दौरान युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने, परिवार और समाज की भूमिका को मजबूत करने तथा नशे के दुष्परिणामों पर खुलकर चर्चा की गई।

बैठकों में विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों, स्कूल-कॉलेजों और छात्रावासों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना प्रशासन को देने का संकल्प लिया गया। पंचायत प्रतिनिधियों, स्थानीय लोगों और युवाओं ने एक स्वर में नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया।

उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि एंटी-चिट्टा अभियान के तहत जिला प्रशासन पुलिस, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है, और इसमें जनभागीदारी से ही स्थायी सफलता हासिल की जा सकती है।

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