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जीवन–मृत्यु की दहलीज़ पर खड़े मरीज की बची जान, बंजार वैली अस्पताल बना भरोसे का केंद्र

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फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।

बंजार वैली अस्पताल एक बार फिर यह साबित करने में सफल रहा है कि संकल्प, समर्पण और सही चिकित्सा दृष्टि के बल पर सीमित संसाधनों के बीच भी असाधारण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। अस्पताल ने हाल के दिनों में कई गंभीर मरीजों की जान बचाकर क्षेत्रवासियों का भरोसा और मजबूत किया है।


हाल ही में बंजार के थाटीबीर क्षेत्र के निवासी 60 वर्षीय डोला दत्त को कुल्लू अस्पताल में अत्यंत क्रिटिकल अवस्था में भर्ती कराया गया था। मरीज लगातार 103 से 104 डिग्री तक तेज बुखार से जूझ रहे थे। कई दिनों तक दवाइयां देने के बावजूद भी बुखार कम होने का नाम नहीं दे रहा था, कुल्लू अस्पताल में करीब चार–पांच दिन तक भर्ती रहने के बावजूद उनके स्वास्थ्य में कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया, जिससे परिजन गहरी चिंता में पड़ गए।
इसी दौरान परिजनों को बंजार वैली अस्पताल की बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं और वहां के डॉक्टरों के प्रयासों की जानकारी मिली। इसके बाद डोला दत्त को बंजार वैली अस्पताल लाने का निर्णय लिया गया। अस्पताल पहुंचते ही डॉ मनीष और डॉ अपर्णा और उनकी मेडिकल टीम ने मरीज की स्थिति का गंभीरता से आकलन किया और तत्काल उपचार शुरू किया।
डॉ मनीष और डॉ अपर्णा के निरंतर, सटीक और समर्पित प्रयासों का ही परिणाम रहा कि मात्र दो दिनों के भीतर मरीज की हालत में स्पष्ट सुधार दिखाई देने लगा। इसके बाद अगले दो दिनों में डोला दत्त पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए गए और अपने घर सुरक्षित लौटे।

यह घटना बंजार वैली अस्पताल की उस बदलती तस्वीर का प्रतीक है, जहाँ इलाज केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और चिकित्सकीय जिम्मेदारी के साथ किया जा रहा है। अस्पताल में ओपीडी सेवाओं, आपातकालीन उपचार, स्टाफ समन्वय और रोगी देखभाल प्रणाली में लगातार सुधार किया गया है, जिसका लाभ सीधे मरीजों तक पहुँच रहा है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बंजार वैली अस्पताल अब केवल एक स्वास्थ्य केंद्र नहीं, बल्कि विश्वास का ठिकाना बनता जा रहा है। जिस तरह से अस्पताल लगातार गंभीर मामलों में सफल उपचार कर रहा है, वह दूरदराज़ के इलाकों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

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