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विक्रमादित्य सिंह की मांग पर PM मोदी ने दी हिमाचल को 2300 करोड़ की सौगात, PMGSY-4 में 249 सड़कें मंजूर

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फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
हिमाचल प्रदेश के लिए सड़क कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के तहत प्रदेश में 249 नई सड़कों के निर्माण के लिए करीब 2,300 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर कर दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना से प्रदेश के सुदूर, दुर्गम और अब तक सड़क सुविधा से वंचित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इस मंजूरी के लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला हिमाचल के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
विक्रमादित्य सिंह की सक्रिय पहल लाई रंग
इस बड़ी उपलब्धि के पीछे लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सक्रिय और प्रभावी भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। हाल ही में उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से मुलाकात कर हिमाचल से जुड़े लंबित मामलों को मजबूती के साथ रखा था। इसके बाद राज्यों के मंत्रियों की बैठक में भी हिमाचल की सड़कों के लिए अतिरिक्त सहायता का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया, जिसका अब सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस संबंध में हिमाचल सरकार को औपचारिक मंजूरी पत्र भी भेज दिया है। योजना के तहत अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है और करीब 1,500 किलोमीटर लंबी नई सड़कों का जाल प्रदेश में बिछाया जाएगा।
डोडरा-क्वार क्षेत्र को भी मिली बड़ी राहत
इस पैकेज की एक और बड़ी खासियत यह है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पहले चरण में लॉक की गई डोडरा-क्वार क्षेत्र की सड़कों को अब अनलॉक कर दिया गया है। इसके साथ ही इन परियोजनाओं से जुड़ी करीब 1,500 करोड़ रुपये की देनदारी भी केंद्र से मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे वर्षों से सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे इलाकों में विकास की रफ्तार तेज होगी और लोगों का जीवन आसान बनेगा।
आधुनिक तकनीक से बनेंगी मजबूत सड़कें
नई सड़कों के निर्माण में आधुनिक तकनीकों और बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित रहें। खासकर जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में इससे न केवल आवाजाही सुगम होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह फैसला हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों के लिए विकास की नई राह खोलने वाला साबित होगा और प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी को एक नई मजबूती देगा।

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