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रुक गई एम्बुलेंस, थम गई सांसें: आपातकाल में मरीजों की जिंदगी अधर में

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फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।

आज शाम 8 बजे से 108/102 एम्बुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश में इसका व्यापक और गंभीर असर आम जनता पर पड़ने लगा है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का अचानक ठप होना ऐसे समय में हुआ है, जब रात के वक्त दुर्घटनाओं, अचानक तबीयत बिगड़ने, हृदय रोग, सांस की समस्या और प्रसव जैसे मामलों की आशंका अधिक रहती है। जैसे ही हड़ताल प्रभावी हुई, वैसे ही कई जिलों से यह शिकायतें सामने आने लगीं कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पा रही है। खासकर ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए स्थिति अत्यंत चिंताजनक बन गई है, जहां 108 और 102 सेवा ही अस्पताल तक पहुंचने का एकमात्र भरोसेमंद साधन होती है।


रात के समय निजी वाहन, टैक्सी या अन्य वैकल्पिक साधन हर परिवार के पास उपलब्ध नहीं होते, जिसके कारण कई मरीजों को पड़ोसियों या रिश्तेदारों की मदद से, तो कुछ को अत्यधिक किराया देकर निजी साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। इससे इलाज में देरी होने के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ा है। कुछ मामलों में मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करने में भी परेशानी आई, जिससे परिजनों की चिंता और डर और अधिक बढ़ गया। गर्भवती महिलाओं के परिजनों में खासतौर पर घबराहट देखी गई, क्योंकि 102 सेवा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है और थोड़ी सी देरी भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
जनता के बीच इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश और बेचैनी है, लेकिन साथ ही कई लोग यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि एम्बुलेंस कर्मचारियों की मांगें कोई नई नहीं हैं। लोगों का मानना है कि यदि कर्मचारियों को समय पर वेतन, ओवरटाइम, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां मिलतीं, तो शायद यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। आम नागरिकों का कहना है कि यह लड़ाई जनता बनाम कर्मचारी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और संवाद की कमी का परिणाम है।
प्रदेशवासियों को अब सरकार और संबंधित एजेंसियों से यही उम्मीद है कि वे हालात की गंभीरता को समझते हुए तुरंत हस्तक्षेप करें, कर्मचारियों से सकारात्मक बातचीत करें और कोई ऐसा समाधान निकालें, जिससे कर्मचारियों के अधिकार भी सुरक्षित रहें और 108/102 जैसी जीवन रक्षक सेवाएं भी बिना किसी रुकावट के बहाल हो सकें। क्योंकि हर गुजरती रात और हर बीतता घंटा न केवल आम जनता की परेशानी बढ़ा रहा है, बल्कि कई जिंदगियों को भी खतरे में डाल रहा है।

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