हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश-विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक राजनीति स्वास्थ्य मेले और त्यौहार

पहाड़ी काष्ठ कला का अंतिम स्तंभ नहीं रहा — श्रीकोट के शिल्पी धनु राम का 93 वर्ष की आयु में निधन– लकड़ी में जीवन फूँकने वाले कलाकार, जिन्होंने कला को पूजा बना दिया –

On: November 8, 2025 9:03 PM
Follow Us:

बंजार। कुल्लू उपमंडल बंजार की शांत वादियों में बसे श्रीकोट गांव से एक ऐसी खबर आई जिसने पूरे कला जगत को शोक में डुबो दिया है। पहाड़ी काष्ठ कला को अपनी आत्मा और जीवन देने वाले 93 वर्षीय प्रसिद्ध शिल्पकार धनु राम अब इस दुनिया में नहीं रहे। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे धनु राम ने आज अपने निवास पर अंतिम सांस ली।

धनु राम — यह नाम न सिर्फ एक व्यक्ति था, बल्कि हिमाचली लोककला का पर्याय बन चुका था। बचपन से ही लकड़ी पर उकेरने का जुनून उनके भीतर ऐसा समा गया कि जीवन का हर पल उसी कला के नाम हो गया। वे कहते थे — “लकड़ी में भी जान होती है, बस उसे पहचानने की नजर चाहिए।”

उनके हाथों से निकली भगवान शिव, गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की मूर्तियाँ आज भी साक्षात प्रतीत होती हैं। उनकी कृतियों में इतनी जीवंतता थी कि दर्शक भाव-विभोर होकर उन्हें निहारता रह जाता।

धनु राम का कला संसार केवल स्थानीय मंदिरों तक सीमित नहीं था। उन्होंने अपनी अमर रचनाएँ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह को भी भेंट की थीं। यह उनके कला कौशल और विनम्र व्यक्तित्व का प्रमाण था।

कुल्लू दशहरा में वे हर वर्ष अपनी रचनाएँ प्रदर्शित करते थे — लकड़ी पर उकेरी जीवन की कहानियाँ, जो हर आने-जाने वाले को ठहर जाने पर मजबूर कर देती थीं। उनकी कला में कुल्लू घाटी की संस्कृति, परंपरा और भक्ति एक साथ सांस लेती थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, धनु राम केवल शिल्पकार ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील व्यक्ति और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी थे। उनके वीरभद्र सिंह और सत्य प्रकाश ठाकुर से घनिष्ठ संबंध रहे। वे मानते थे कि कला और समाज सेवा, दोनों आत्मा की साधना हैं।

उनके निधन से घाटी में गहरा शोक व्याप्त है। ग्रामीणों ने कहा — “धनु राम सिर्फ मूर्तियाँ नहीं गढ़ते थे, वे उनमें आत्मा डालते थे। उनका जाना पहाड़ी काष्ठ कला के एक युग का अंत है।”

उनका अंतिम संस्कार कल रविवार को उनके पैतृक गांव श्रीकोट में पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा।
आज जब लकड़ी की कला आधुनिकता की चकाचौंध में कहीं खोती जा रही है, धनु राम की यादें और उनकी रचनाएँ इस बात की मिसाल हैं कि सच्ची कला कभी नहीं मरती — वह अपने रचयिता के साथ अमर हो जाती है।

– श्रद्धांजलि –
धनु राम (1932–2025):
“जिन्होंने लकड़ी में आत्मा ढूंढ ली, और पत्थर-से समय में भी अपनी छाप छोड़ दी।”

व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर (X) पर शेयर करने के लिए निम्नलिखित बटन पर क्लिक करें।

और पढ़ें

बजट में नीयत और हकीकत का फासला, जनता को फिर मिली निराशा— एचपीसीसी लीगल सेल महासचिव अरुण प्रकाश आर्य

निस्वार्थ सेवा की त्रिवेणी से बदला बंजार का सामाजिक परिदृश्य

नागरिक अस्पताल बंजार से चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति पर भड़के विधायक सुरेंद्र शौरी, अस्पताल परिसर के बाहर दिया धरना

केंद्रीय बजट 2026–27: हिमालय की ज़रूरतें हाशिये पर, कॉरपोरेट प्राथमिकताओं को बढ़ावा—हिमालय नीति अभियान

वैश्विक आर्थिक शक्ति का पुनर्संतुलन: क्या भारत नई धुरी बन रहा है?

फायर एनओसी के नाम पर कारोबार नहीं रुकेगा: होम-स्टे को अस्थायी नवीनीकरण देने के निर्देश, मुख्यमंत्री सुक्खू ने लॉन्च किया ऑनलाइन पोर्टल

You cannot copy content of this page