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“जब समाज जागा, तब बदलाव आया—बंजार विधिक शिविर ने जगाई नई उम्मीद”

फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार

आज उपमंडल बंजार में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति तथा उपमंडल विधिक सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में विशाल विधिक साक्षरता शिविर का प्रभावशाली आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र राणा ने समाज, युवा, पर्यावरण और प्राकृतिक आपदाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारोत्तेजक संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की रोकथाम, नशा उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा और स्वस्थ सामाजिक वातावरण का निर्माण केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए हर नागरिक को जागरूक, जिम्मेदार और सहयोगी बनना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कुल्लू जिले में दर्ज 1200 मामलों में से 1100 मामले नशे से जुड़े हैं, जो दर्शाता है कि नशा किस हद तक समाज को भीतर से खोखला कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि कानून सजा दे सकता है, सुधार का रास्ता दिखा सकता है, लेकिन नशा उन्मूलन का वास्तविक समाधान समाज की सामूहिक चेतना, प्रयासों और जागरूकता में ही निहित है।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जीवन की मूल आवश्यकता बताते हुए कहा कि जंगलों का संरक्षण, नदी-नालों की स्वच्छता, प्लास्टिक का त्याग और प्रकृति से छेड़छाड़ न करना हर नागरिक का नैतिक दायित्व है, क्योंकि प्रदूषण और अवैध खनन जैसी गतिविधियाँ प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा देती हैं।

प्रकाश चंद राणा अध्यक्ष विधिक सेवा प्राधिकरण कुल्लू

आभा चौहान, माननीय सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति की सचिव आभा चौहान ने नशा उन्मूलन, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास पर कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और धरती हमारी ही नहीं, आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने नशे को अपराध नहीं, बल्कि एक बीमारी बताते हुए कहा कि इस लड़ाई को समाज के सहयोग और समझदारी से ही जीता जा सकता है।

कार्यक्रम के बाद  प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए

उपमंडल अधिकारी पंकज शर्मा ने 2023 और 2025 की प्राकृतिक आपदाओं की भयावहता का उल्लेख करते हुए बताया कि बंजार उपमंडल में 365 घर पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए और लगभग 40 गांव भूस्खलन के गंभीर खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और स्टेट डिजास्टर अथॉरिटी के सहयोग से राहत और पुनर्वास कार्य जारी हैं, परंतु भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए जन-जागरूकता, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन अत्यंत आवश्यक है। अधिवक्ता प्रतीश राही ने भूमि, जल और वायु प्रदूषण के प्रति सचेत करते हुए कहा कि पौधारोपण, डस्टबिन का सही उपयोग, अवैध खनन से दूरी और स्वच्छता के प्रति संवेदनशीलता ही आने वाले समय की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

डीएसपी बंजार शेर सिंह ठाकुर ने नशे को समाज के लिए घातक बताते हुए कहा कि यह न केवल युवाओं की मानसिक और शारीरिक क्षमता को नष्ट करता है, बल्कि पूरे समाज को दूषित कर देता है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन हमेशा सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन नशा उन्मूलन में समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है, विशेषकर केमिकल ड्रग्स जैसी खतरनाक प्रवृत्तियों से युवाओं को बचाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है।

कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय बंजार की छात्रा प्रांजल नेगी ने पर्यावरण संरक्षण पर ओजस्वी भाषण देकर पूरे सभागार को प्रेरित किया, जबकि ट्रिनिटी पब्लिक स्कूल के छात्र कार्तिक चौहान ने “वसुधैव कुटुंबकम” के भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि आपदा प्रभावितों के पुनर्वास में परस्पर सहयोग, संवेदना और मानवता सबसे शक्तिशाली साधन हैं।

इस दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बंजार की छात्रा रिया ने अपने सारगर्भित भाषण में कहा कि युवा यदि अपने भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो उन्हें नशे से दूर रहना ही होगा। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि “समाज हमें टोके उससे पहले स्वयं जाग जाएँ, समझ जाएँ; तभी हम आदर्श बन सकते हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा भी।”

कार्यक्रम के समापन पर कर्म प्रताप सिंह ठाकुर, अध्यक्ष उपमंडल विधि सेवा समिति एवं व्यवहार न्यायाधीश, न्यायिक दंडाधिकारी बंजार ने मुख्य अतिथि, उपस्थित गणमान्यों और समस्त जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नशा उन्मूलन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित यह महा-समारोह समाज में एक सकारात्मक संदेश पहुंचाएगा, जिससे पूरी समुदाय को लाभ मिलेगा और समाज बुराइयों से दूर रह सकेगा।

मंच संचालक अधिवक्ता विनय डोगरा ने अपनी प्रभावशाली और ऊर्जावान वाणी से पूरे कार्यक्रम को सार्थक और जीवंत बनाए रखा।

यह संपूर्ण कार्यक्रम समाज में जागरूकता, समर्पण और सामूहिक उत्तरदायित्व की नई सोच उत्पन्न करने वाला सिद्ध हुआ और यह संदेश देकर समाप्त हुआ कि एक सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य केवल तब संभव है, जब समाज प्रशासन के साथ मिलकर जागरूकता, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से आगे बढ़े।

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