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रंग, रिश्ते और परंपरा का उत्सव: 2 मार्च को होली से सराबोर होगा सुन्दर नगर

फ्रंट पेज न्यूज़ सुंदर नगर (विजय)।
सुन्दर नगर में इस वर्ष होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे का जीवंत उत्सव बनकर सामने आएगी। 2 मार्च को पूरा नगर अबीर-गुलाल की खुशबू और ढोल-नगाड़ों की थाप पर रंगों में डूबा नजर आएगा। व्यापार मंडल प्रधान प्रवीण अग्रवाल के अनुसार नगरवासियों ने सर्वसम्मति से इसी दिन होली मनाने का निर्णय लिया है, जिससे सामूहिक उत्सव की पुरानी परंपरा और मजबूत होगी।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि के प्रदोषकाल में होने वाला यह दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय, सामाजिक सद्भाव और नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है। परिवार, मोहल्ले और बाजार—हर स्थान पर लोग एकत्र होकर होलिका की परिक्रमा करेंगे और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
प्रशासन की ओर से मंडी सदर में 3 मार्च को स्थानीय अवकाश घोषित होने के बावजूद सुन्दर नगर का 2 मार्च को होली मनाने का निर्णय इसकी सांस्कृतिक स्वायत्तता और परंपराओं के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार प्रदोषकाल में होलिका दहन को शास्त्र सम्मत मानते हुए नगर ने धार्मिक परंपरा को प्राथमिकता दी है।
बाजारों में रंग, गुलाल, पारंपरिक मिठाइयों और पिचकारियों की दुकानों पर बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत दे रही है कि यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक मेल-मिलाप का भी आधार है। युवा जहां रंगोत्सव की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं बुजुर्ग लोक परंपराओं और फाग गीतों की यादें ताजा कर रहे हैं।
सुन्दर नगर की होली की खासियत यह है कि यहां रंग खेलने के साथ-साथ आपसी मनमुटाव मिटाने और रिश्तों को नई गर्माहट देने की परंपरा भी निभाई जाती है। 2 मार्च को दिनभर चलने वाला रंगोत्सव और शाम को विधि-विधान से होने वाला होलिका दहन पूरे नगर को एक सूत्र में बांध देगा।
यह होली केवल कैलेंडर की तिथि नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक उत्सवधर्मिता का जीवंत प्रतीक बनकर सुन्दर नगर की फिजाओं में रंग घोलने जा रही है।
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