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तीर्थन घाटी में गूंजा आस्था और परंपरा का स्वर, तिन्दर गांव में धूमधाम से मनाया गया प्राचीन मुखौटा उत्सव फागली


फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार (परसराम भारती)।

जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की सुरम्य तीर्थन घाटी इन दिनों भक्ति, उल्लास और लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर है। फागुन संक्रांति के पावन अवसर पर विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की गोद में बसे तिन्दर गांव में भगवान विष्णु नारायण को समर्पित प्राचीनतम मुखौटा उत्सव फागली श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया।

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सुबह से ही गांव में उत्सव का वातावरण बना रहा। देवता विष्णु नारायण की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर मुखौटा नृत्य प्रस्तुत किया गया। आकर्षक मुखौटे धारण किए मढयालों ने लोकनृत्य के माध्यम से देव आशीर्वाद का संदेश दिया और उपस्थित श्रद्धालुओं को जुब बांटकर सुख-समृद्धि की कामना की। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग तिन्दर पहुंचे।


तीर्थन घाटी के दूरदराज क्षेत्रों में यह उत्सव तीन दिन तक चलता है और हर गांव में अलग-अलग दिन फागली मनाने की परंपरा है। तिन्दर में आयोजित समारोह के दौरान अतिथियों और ग्रामीणों को पारंपरिक व्यंजन चिलडू परोसा गया। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे पूरे गांव में सामूहिकता और भाईचारे का अनूठा माहौल देखने को मिला।
स्थानीय लोगों के अनुसार फागली उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की समृद्ध लोकसंस्कृति और आस्था का जीवंत प्रतीक है। मान्यता है कि इस पर्व के आयोजन से क्षेत्र में सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है तथा नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरी तीर्थन घाटी में मनाया जाने वाला यह प्राचीन उत्सव न केवल परंपराओं को जीवित रखे हुए है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी माध्यम बन रहा है। हर वर्ष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाने वाला फागली पर्व बंजार और तीर्थन घाटी की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त कर रहा है।

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