फ्रंट पेज न्यू शिमला।
हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश में नशा-रहित औद्योगिक भांग की नियंत्रित और वैध खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसान, उद्योग और राज्य की अर्थव्यवस्था—तीनों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है—यह पहल नशे के लिए नहीं, बल्कि उद्योग और रोजगार के लिए है।6 दशकों से कुल्लू, मंडी और चंबा जैसी घाटियों में जंगली रूप से उगने वाली भांग को अब तक अवैध व्यापार से जोड़ा जाता रहा, लेकिन नई नीति इसे एक बहुमूल्य औद्योगिक संसाधन के रूप में स्थापित करेगी।
औद्योगिक उपयोग, सख्त मानक
सरकार के अनुसार, औद्योगिक उपयोग के लिए उगाई जाने वाली भांग में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम रखी जाएगी, ताकि किसी भी तरह का नशीला दुरुपयोग न हो। वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप विकसित बीजों से उच्च गुणवत्ता वाला फाइबर और बीज प्राप्त होगा, जिनका उपयोग—
पर्यावरण-अनुकूल वस्त्र उद्योग
कागज और पैकेजिंग
कॉस्मेटिक व आयुर्वेद
बायो-फ्यूल, ऊर्जा और बायो-प्लास्टिक
जैसे आधुनिक क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
500 से 2000 करोड़ तक अतिरिक्त राजस्व का अनुमान
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि 24 जनवरी 2025 को राज्य मंत्रिमंडल ने भांग की नियंत्रित खेती के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। सरकारी आकलन के अनुसार, योजना के पूर्ण क्रियान्वयन पर राज्य को सालाना 500 से 2000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। साथ ही, यह फसल कपास की तुलना में करीब 50% कम पानी मांगती है और जंगली जानवरों से भी सुरक्षित रहती है—जो जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए बड़ा लाभ है।
विश्वविद्यालयों को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस पहल को वैज्ञानिक आधार देने के लिए चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को कम THC और अधिक उपज वाले बीज विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में गठित समिति ने उत्तराखंड के डोईवाला और मध्य प्रदेश में चल रही भांग की खेती का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपी हैं।
विधानसभा में उठा सवाल, सरकार ने दिया स्पष्ट जवाब
हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र में धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने भांग की खेती पर गठित समितियों और नीति की प्रगति को लेकर सवाल उठाया। इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने लिखित जवाब में बताया कि समिति की सिफारिशों को विधानसभा से मंजूरी मिल चुकी है और 9 जनवरी 2024 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की सिफारिश की है।
लक्ष्य: उद्योग, रोजगार और समृद्ध हिमाचल
सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री, विशेष वस्त्र और आयुर्वेदिक उत्पादों का केंद्र बनाना है। इससे न केवल युवाओं के लिए स्टार्ट-अप और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि राज्य की प्राकृतिक संपदा का लाभ नशा माफिया के बजाय सीधे किसानों और सरकारी खजाने तक पहुंचेगा।
निष्कर्ष:
‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल के साथ हिमाचल प्रदेश में नशा-रहित भांग अब विवाद नहीं, बल्कि विकास का प्रतीक बनने जा रही है—जो किसानों की आय बढ़ाएगी, उद्योग को गति देगी और प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत
हिमाचल में नशा-रहित भांग के पौधों से से बदलेगी किस्मत: सीएम सुक्खू की ‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल से किसान होंगे मालामाल

