फ्रंट पेज न्यूज़,बंजार/कुल्लू।
कहावत है कि “दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक कर पीता है।” यही सोच इस वर्ष मानसून सीजन की तैयारियों में प्रशासन की कार्यशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। वर्ष 2023 और 2025 में मानसून के दौरान आई भयावह प्राकृतिक आपदाओं, भूस्खलनों, बादल फटने की घटनाओं और बाढ़ से हुए भारी नुकसान ने प्रशासन और आम जनता दोनों को गहरे सबक दिए हैं।

इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने किसी भी संभावित अनहोनी से पहले ही व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं ताकि जन-धन की हानि को न्यूनतम रखा जा सके और सामाजिक परिवेश को सुरक्षित बनाए रखा जा सके।
आगामी मानसून सत्र को देखते हुए आयोजित की जा रही “मानसून प्रीपेयर्डनेस मीटिंग-2026” के लिए विस्तृत एजेंडा तैयार किया गया है, जिसमें विभिन्न विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपते हुए आपदा प्रबंधन को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया है।

जिला सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में सड़कें, पुल, पेयजल योजनाएं और बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। वहीं वर्ष 2025 में भी भारी वर्षा और भूस्खलनों ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। इन परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आपदा के समय राहत कार्यों से अधिक महत्वपूर्ण आपदा से पहले की तैयारी होती है। इसी दृष्टिकोण के साथ प्रशासन इस बार पहले से ही सक्रिय नजर आ रहा है।
बैठक के एजेंडा के अनुसार नालियों और जल निकासी चैनलों की सफाई, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, नदी-नालों के जलस्तर की निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना तथा आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा।

लोक निर्माण विभाग, नगर निकायों, पंचायती राज संस्थाओं, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, जल शक्ति विभाग, विद्युत बोर्ड तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है जो भूस्खलन, बाढ़ या सड़क अवरोध जैसी समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं। सभी उपमंडल अधिकारियों, लोक निर्माण विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय सुनिश्चित करने को कहा गया है।


इसके अतिरिक्त आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सेना, वायु सेना, एसडीआरएफ, होमगार्ड, अग्निशमन सेवाओं, रेडक्रॉस और आपदा मित्र स्वयंसेवकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की रणनीति भी तैयार की जा रही है।
प्रशासन द्वारा आपातकालीन संचालन केंद्र (EOC) और कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली को भी सुदृढ़ बनाया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में सूचना का त्वरित आदान-प्रदान और राहत कार्यों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही लोगों को मानसून के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई है।

मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो प्रशासन का यह प्रयास केवल सरकारी औपचारिकता नहीं बल्कि लोगों के जीवन, आजीविका और सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है। बीते वर्षों की त्रासदियों से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन की प्राथमिकता स्पष्ट है—आपदा आने के बाद राहत नहीं, बल्कि आपदा आने से पहले तैयारी। यही दूरदर्शिता आने वाले मानसून में संभावित जोखिमों को कम करने और समाज को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।






